जामताड़ा: सदर प्रखंड अंतर्गत सुखजोड़ा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना में कथित अनियमितताओं को लेकर गुरुवार को ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया. बड़ी संख्या में ग्रामीण पंचायत सचिवालय पहुंचे और घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जारी लाभुक सूची में कई पात्र और जरूरतमंद परिवारों का नाम शामिल नहीं किया गया है, जबकि पहले से पक्के और दो-तीन मंजिला मकानों में रहने वाले लोगों को योजना का लाभ दिया गया है.


प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने पंचायत सचिव और मुखिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए. ग्रामीणों का आरोप था कि आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं और वास्तविक गरीब परिवारों को जानबूझकर योजना से वंचित किया जा रहा है.
ग्रामीण मनोज कुमार मंडल ने कहा कि सुखजोड़ा पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना की सूची की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. उनका आरोप है कि कई ऐसे लोगों को लाभ दिया गया है जिनके पास पहले से पक्का मकान है, जबकि कच्चे मकानों में रहने वाले गरीब परिवार सूची से बाहर हैं. उन्होंने पंचायत सचिव पर नियमित रूप से पंचायत में उपस्थित नहीं रहने का भी आरोप लगाया.
ग्रामीण सुदीप हेंब्रम ने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक गरीबों तक पहुंचना चाहिए, लेकिन यहां पैसे लेकर लाभ देने का खेल चल रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि कई लोगों से पैसे लेने के बाद भी केवल आश्वासन दिया गया और आज तक आवास स्वीकृत नहीं हुआ.
वहीं उत्तरा मंडल ने बताया कि उनसे जियो टैगिंग के नाम पर पैसे लिए गए थे और जल्द प्रधानमंत्री आवास दिलाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन अब तक उन्हें योजना का लाभ नहीं मिला. उन्होंने कहा कि उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और आज भी कच्चे मकान में रहने को मजबूर है.
ग्रामीण सपन मंडल ने भी योजना में अनियमितता का आरोप लगाते हुए कहा कि पात्र लाभुकों को योजनाओं से वंचित किया जा रहा है. उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा योग्य लाभुकों को योजना का लाभ सुनिश्चित करने की मांग की.
इधर पंचायत के मुखिया जोसेफ मुर्मू ने सभी आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि पूर्व में करीब 550 लोगों का जियो टैग किया गया था, लेकिन अंतिम सूची में केवल 450 लोगों का नाम शामिल हुआ है. जिन लोगों का नाम सूची से छूटा है, उसके कारणों की जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं है. उन्होंने बताया कि ग्राम सभा के माध्यम से सूची सार्वजनिक की गई थी. यदि किसी योग्य व्यक्ति का नाम छूट गया है तो उसकी जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं डीडीसी को देकर नाम जोड़ने का प्रयास किया जाएगा.
पंचायत सचिव शालिनी गौतम ने भी पैसे की लेन-देन और गलत तरीके से लाभ देने के आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना का सर्वे उनके कार्यकाल में नहीं हुआ था. पूर्व में ग्राम सेवक द्वारा सर्वे और जियो टैगिंग का कार्य कराया गया था.
मामले को लेकर प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचल अधिकारी उबेश्वर मुर्मू ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है. छूटे हुए लाभुकों से आवेदन मांगा गया है तथा लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

