रांची: झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिलने की खबर है. सूत्रों के अनुसार. भाकपा (माओवादी) का एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा को सीआरपीएफ की 209 कोबरा बटालियन ने गिरफ्तार कर लिया है. उसके साथ माओवादी संगठन से जुड़े मोछू और गौरव हांसदा को भी गिरफ्तार किए जाने की सूचना है. हालांकि. तीनों की गिरफ्तारी को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है.



सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान के दौरान की गई. बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई धनबाद- गिरिडीह सीमा से सटे मनियाडीह क्षेत्र से उस वक्त की गई. जब तीनों कोल्हान के सारंडा से निकलकर गिरिडीह की ओर बढ़ रहे थे.इसी दौरान खुफिया एजेंसियों को उसकी सटीक लोकेशन मिली. सूचना के आधार पर झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ की 209 कोबरा बटालियन ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी की और अभियान चलाकर तीनों को दबोच लिया.

मिसिर बेसरा
मिसिर बेसरा को भाकपा (माओवादी) के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता रहा है. वह वर्षों से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जंगलों में सक्रिय था. उस पर कई बड़े नक्सली हमलों की साजिश रचने, सुरक्षा बलों पर हमले कराने और संगठन के विस्तार में अहम भूमिका निभाने के आरोप हैं. केंद्र और विभिन्न राज्य सरकारों की ओर से उस पर कुल एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित था.
गौरतलब है कि मंगलवार को ही रांची में झारखंड पुलिस के समक्ष 15 लाख रुपये के इनामी रीजनल कमांडर समेत 16 खूंखार नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. आत्मसमर्पण के दौरान 11 अत्याधुनिक हथियार और 1,562 जिंदा कारतूस भी सुरक्षा बलों को सौंपे गए थे. ऐसे में यदि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि होती है. तो यह झारखंड में नक्सल उन्मूलन अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल होगी.
लगातार आत्मसमर्पण और शीर्ष नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई से कोल्हान, सारंडा और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका माना जा रहा है. तीनों की गिरफ़्तारी के बाद झारखंड नक्सलमुक्त राज्य बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है. फिलहाल आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है. सुरक्षा एजेंसियों और सीआरपीएफ की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति या पुष्टि होने के बाद पूरे अभियान और गिरफ्तारी से जुड़े तथ्यों का विस्तृत खुलासा किया जा सकता है.





