सरायकेला/ Pramod Singh जिले के खरसावां में बुधवार को 91वां उत्कल दिवस हर्षोल्लास और सांस्कृतिक उत्साह के साथ मनाया गया. कार्यक्रम का आयोजन उत्कल सम्मेलनो जिला समिति के तत्वावधान में किया गया.


कार्यक्रम की शुरुआत राजमहल चौक स्थित गोप बंधु दास की प्रतिमा एवं मधुसूदन दास के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई. इसके बाद उपस्थित लोगों ने अपनी मातृभाषा, सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया.
इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष बिरोजा पति ने कहा कि मातृभाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान रखना हम सभी का कर्तव्य है. उन्होंने महान समाजसेवियों के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया.
जिला सचिव अजय कुमार प्रधान ने उत्कल दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि 1 अप्रैल 1936 को ओडिशा राज्य का गठन हुआ था. उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और संस्कृति का आधार भी है.
वहीं जिला निर्देशक सुशील षाड़ंगी ने कहा कि भाषा, संस्कृति और इतिहास को सहेजने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है. उन्होंने आगामी जनगणना के मद्देनजर लोगों से अपनी मातृभाषा ‘उड़िया’ दर्ज कराने की अपील की, ताकि भाषा की पहचान और मजबूती बनी रहे. कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि शिक्षा के बिना संस्कृति का विकास संभव नहीं है और उड़िया भाषा में शिक्षा से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में उत्कल सम्मेलनो हर संभव सहयोग करेगा.
इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य लोग, शिक्षक, छात्र- छात्राएं एवं समाजसेवी उपस्थित रहे. पूरे कार्यक्रम में भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व और समर्पण का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला.



