कांड्रा: रिमझिम बारिश के बीच कांड्रा में भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा (उल्टा) रथयात्रा शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुई. आठ दिनों तक मौसीबाड़ी में विश्राम करने के बाद महाप्रभु जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर अपने श्रीधाम लौटे. बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर रहा और “जय जगन्नाथ” के जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा.



पुरातन मान्यताओं के अनुसार भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा आठ दिनों तक मौसीबाड़ी में विराजमान रहते हैं. इसके बाद नौवें दिन बाहुड़ा रथयात्रा के माध्यम से अपने श्रीधाम लौटते हैं. इस अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने रिमझिम बारिश के बीच पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया तथा क्षेत्र की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.

घर वापसी से पूर्व मौसीबाड़ी में विधि-विधान के साथ विशेष पूजा-अर्चना की गई. भगवान को फल, पकवान एवं विभिन्न प्रकार के मिष्ठान्न का भोग अर्पित किया गया. इसके बाद महाप्रभु के रथ को खींचने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला. हल्की बारिश के बीच भी श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर रथयात्रा में शामिल रहे. प्रसाद ग्रहण करने और लूट प्रसाद प्राप्त करने के लिए भी भक्तों में विशेष उत्सुकता रही.
शुक्रवार शाम निकली बाहुड़ा रथयात्रा देर शाम मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई. रथयात्रा मार्ग पर जगह-जगह सेवा शिविर एवं अस्थायी दुकानें लगाई गई थीं. विभिन्न गांवों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया. पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखने में मुस्तैद रहा.
रथयात्रा समिति के अध्यक्ष विजय महतो ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा रथयात्रा सनातन परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि रिमझिम बारिश भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी. समिति के सदस्यों, श्रद्धालुओं और प्रशासन के सहयोग से यह आयोजन शांतिपूर्ण एवं सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. उन्होंने महाप्रभु से क्षेत्रवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की.





