सरायकेला/ Chief Editor जिले के शिक्षा विभाग में इन दिनों शिक्षा कम और “छवि सुधार” ज्यादा पढ़ाया जा रहा है. जैसे ही कथित भ्रष्टाचार से जुड़ी खबरें इंडिया न्यूज़ वायरल में सामने आईं, विभाग में अचानक सक्रियता का स्तर इतना बढ़ गया मानो सालों से सोया सिस्टम एक ही झटके में जाग गया हो. फर्क सिर्फ इतना है कि यह जागरूकता छात्रों के लिए नहीं, बल्कि खबरों के लिए दिख रही है.

कहा जा रहा है कि अब विभाग में एक नई “विशेष कक्षा” शुरू हो चुकी है विषय है “खबर से कैसे निपटें”. इस कक्षा में किताबों से ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि खबर का जवाब कैसे दिया जाए या फिर जवाब देने से कैसे बचा जाए. इसके लिए जिला शिक्षक संघ से जुड़े गुरूजी “पहले केस, बाद में तथ्य” के सिद्धांत पर काम कर रहे है.
शिक्षक संघ की एंट्री ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है. जिन गुरूजनों का काम बच्चों को ज्ञान देना है, वे अब कानून की व्याख्या करते नजर आ रहे हैं. हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या यह पहल स्वेच्छा से हो रही है या फिर किसी और की “प्रेरणा” काम कर रही है.
नीचे दिए लिंक को क्लिक करें और जानें आखिर क्या वजह है कि गुरुजनों को सड़क पर उतरने की नौबत आई.
https://indianewsviral.co.in/saraikela-education-controversy/
https://indianewsviral.co.in/saraikela-education-department-corruption/
https://indianewsviral.co.in/saraikela-brc-corruption/
https://indianewsviral.co.in/saraikela-block-education-office/
इंडिया न्यूज़ वायरल का तर्क सीधा है- अगर खबर गलत है तो उसका तथ्यात्मक खंडन दीजिए. प्रमाण रखिए. लेकिन यहां तो समीकरण कुछ और ही नजर आ रहा है. खबर पर जवाब देने के बजाय खबर लिखने वालों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं. मानो समस्या खबर नहीं, बल्कि खबर का सामने आना है.
जनता भी इस पूरे घटनाक्रम को गौर से देख रही है. चाय की दुकानों से लेकर सोशल प्लेटफॉर्म तक एक ही चर्चा है- अगर सब कुछ सही है तो जांच से परहेज क्यों. और अगर कहीं गड़बड़ी है, तो फिर खबर से इतनी बेचैनी क्यों ?
व्यंग यही कहता है कि सरायकेला का शिक्षा विभाग इन दिनों “ब्लैकबोर्ड” से ज्यादा “बैकडोर” पर ध्यान दे रहा है. पढ़ाई का सिलेबस भले पीछे छूट जाए, लेकिन इमेज मैनेजमेंट का पाठ तेजी से पूरा किया जा रहा है. अब असली परीक्षा बाकी है. देखना यह है कि आने वाले दिनों में जवाब तथ्यों से दिए जाएंगे या फिर सवाल पूछने वालों की ही “क्लास” ली जाएगी. क्योंकि लोकतंत्र में कॉपी जांचने का अधिकार सबको है- और यहां तो कॉपी भी जनता की है और सवाल भी.

