सरायकेला/ Pramod Singh जिले में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के नाम पर की गई कार्रवाई अब विवादों में घिरती नजर आ रही है. तीन स्कूलों का रिजल्ट खराब आने के बावजूद कार्रवाई केवल एक विद्यालय तक सीमित रहने से निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो गए हैं.

सरायकेला- खरसावां जिले के केबीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट बालिका विद्यालय में लगातार दो वर्षों से खराब परीक्षा परिणाम को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने प्रभारी प्रधानाध्यापक नारायण कुमार को पद से हटा दिया है. उनकी जगह शिक्षिका मिनाक्षी रजक (टीजीटी, इतिहास) को प्रभारी प्रधानाध्यापिका बनाया गया है.
जारी आदेश में कहा गया है कि खराब परिणाम यह दर्शाता है कि तत्कालीन प्रभारी अपने दायित्वों के प्रति संवेदनशील नहीं थे और प्रशासनिक रूप से भी अपेक्षित क्षमता नहीं दिखा पाए. छात्राओं के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिले के अन्य स्कूलों में भी खराब परिणाम सामने आने के बावजूद वहां किसी प्रकार की कार्रवाई क्यों नहीं हुई. एनआर गवर्नमेंट स्कूल और कस्तूरबा गांधी विद्यालय, सरायकेला के परिणाम भी कमजोर रहे, लेकिन वहां न तो प्राचार्य से जवाब- तलब किया गया और न ही विषयवार शिक्षकों की जिम्मेदारी तय की गई.
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि खराब परिणाम पर कार्रवाई करनी है तो वह सभी स्कूलों पर समान रूप से होनी चाहिए. केवल एक विद्यालय को निशाना बनाना पक्षपातपूर्ण कार्रवाई की ओर इशारा करता है.
जिला शिक्षा पदाधिकारी ने निर्देश दिया है कि नारायण कुमार दो दिनों के भीतर विद्यालय का संपूर्ण प्रभार, जिसमें वित्तीय कार्य भी शामिल हैं, अद्यतन कर मिनाक्षी रजक को सौंप दें. साथ ही नई प्रभारी प्रधानाध्यापिका को विद्यालय संचालन की जिम्मेदारी संभालने और इसकी सूचना विभाग को देने को कहा गया है. अब देखना होगा कि विभाग इन आरोपों और उठते सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या अन्य स्कूलों पर भी समान कार्रवाई की जाती है या नहीं.

