सरायकेला/ Pramod Singh प्रखंड के शिक्षा विभाग में ट्रेज़री मैसेंजर के चयन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. आरोप है कि पूरी चयन प्रक्रिया को गुपचुप और पूर्व निर्धारित तरीके से अंजाम दिया गया. शिक्षकों को पहले किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई और फिर अचानक बुलाकर औपचारिकता पूरी कर दी गई.

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस बीआरसी में सामान्य बैठकों के दौरान शिक्षकों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलतीं, वहीं चयन के दिन “जलजीरा” पिलाकर माहौल को प्रभावित करने की कोशिश की गई. इसे लेकर शिक्षकों के बीच गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने आरोप लगाया है कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और कुछ चुनिंदा लोगों की मिलीभगत से पूरा चयन पहले से ही तय कर लिया गया था. उनका कहना है कि मैसेंजर चयन की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई, जिससे अन्य योग्य और इच्छुक शिक्षक प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हो सके. जानकारी के अनुसार, शिक्षकों को प्रपत्र से जुड़े कार्य का हवाला देकर बीआरसी बुलाया गया. वहां पहुंचने पर पहले जलजीरा पिलाया गया और फिर अचानक चयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई. कुछ ही देर में कामिनी कांत मेहता के नाम पर मुहर लगा दी गई.
शिक्षकों का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया केवल दिखावा थी और बिना किसी प्रतिस्पर्धा के चयन पूरा कर लिया गया. कई संभावित दावेदार या तो जानकारी के अभाव में नहीं पहुंच सके या फिर अचानक प्रक्रिया होने के कारण अपनी दावेदारी नहीं रख पाए. इस मामले ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितता साबित होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए.

