
सरायकेला: झारखंड आंदोलन के महानायक और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक पूर्व मुख्यमंत्री दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से अलंकृत किए जाने पर पूरे झारखंड में खुशी की लहर है. राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यह प्रतिष्ठित सम्मान शिबू सोरेन की धर्मपत्नी रूपी सोरेन को प्रदान किया.


इस अवसर पर नगर पंचायत सरायकेला के अध्यक्ष एवं झामुमो नेता मनोज कुमार चौधरी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इसे पूरे झारखंड और देश के आदिवासी समाज के लिए ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण बताया.
मनोज चौधरी ने कहा कि यह सम्मान केवल दिशोम गुरु शिबू सोरेन का नहीं, बल्कि देश के 10 करोड़ आदिवासी भाई- बहनों और झारखंड के 4 करोड़ निवासियों के संघर्ष, सम्मान और अस्मिता का सम्मान है. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा, सामाजिक न्याय की स्थापना तथा अलग झारखंड राज्य के निर्माण के लिए शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया.
दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने शोषित, वंचित, आदिवासी एवं मूलवासी समाज की आवाज बनकर जीवनभर संघर्ष किया. आज उन्हें मिला पद्म भूषण सम्मान उनके त्याग, संघर्ष और जनसेवा की राष्ट्रीय स्वीकृति है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से रूपी सोरेन द्वारा यह सम्मान ग्रहण किया जाना पूरे झारखंड के लिए बेहद भावुक, ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है. दिशोम गुरु की विरासत आने वाली पीढ़ियों को अपने अधिकारों, संस्कृति और समाज के प्रति समर्पित होकर कार्य करने की प्रेरणा देती रहेगी.
चौधरी ने कहा कि झारखंड आंदोलन के इतिहास में शिबू सोरेन का योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. उनका संघर्ष, विचार और नेतृत्व सदैव समाज को नई दिशा देता रहेगा. उन्होंने दिशोम गुरु को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए कहा कि उनकी विरासत झारखंड के विकास, सामाजिक न्याय और आदिवासी हितों की लड़ाई को हमेशा प्रेरित करती रहेगी.
अंत में मनोज चौधरी ने कहा कि पद्म भूषण सम्मान से पूरे झारखंड का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है और यह सम्मान राज्य के संघर्षशील इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान है.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह






