
सरायकेला: सहायक शिक्षिका सुलेखा महतो की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक न शिक्षा विभाग की ओर से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आया है और न ही शिक्षक संघ की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आई है. ऐसे में पूरे मामले को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं.


जानकारी के अनुसार, सुलेखा महतो पिछले करीब चार महीनों से चाईबासा से सरायकेला जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय उपस्थिति दर्ज कराने आती थीं. चर्चा है कि इस दौरान उनकी किसी विद्यालय में प्रतिनियुक्ति नहीं हुई थी. यदि यह तथ्य सही है, तो सवाल उठता है कि आखिर उन्हें इतने लंबे समय तक विद्यालय क्यों नहीं भेजा गया.
यह भी चर्चा है कि प्रतिनियुक्ति नहीं होने के कारण उनका वेतन लंबित था और कुछ औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद भुगतान होना था. हालांकि, इस संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सार्वजनिक नहीं किया गया है.
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि समय पर प्रतिनियुक्ति होती, तो क्या उन्हें रोज इतनी लंबी दूरी तय करनी पड़ती. हालांकि, यह कहना संभव नहीं है कि दुर्घटना का कारण यही था, लेकिन पूरी प्रक्रिया की समीक्षा और जवाबदेही तय करने की मांग जरूर उठ रही है.
दूसरी ओर, शिक्षक संघ की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है. कई लोगों का कहना है कि जब विभिन्न मुद्दों पर संगठन सक्रिय होकर अपनी बात रखता है, तो अपनी ही दिवंगत सहकर्मी के मामले में अब तक कोई सार्वजनिक पहल क्यों नहीं दिखी.
अब लोगों की नजर जिला शिक्षा पदाधिकारी और शिक्षक संघ दोनों पर है. उम्मीद की जा रही है कि विभाग यह स्पष्ट करेगा कि प्रतिनियुक्ति और वेतन में देरी की स्थिति क्यों बनी, जबकि शिक्षक संघ भी इस मामले में अपना पक्ष सार्वजनिक करेगा. इससे तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी और भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकेंगे.
प्रमोद सिंह
संपादक






