सरायकेला: जिले के चांडिल थाना क्षेत्र में अवैध महुआ चुलाई शराब के खिलाफ उत्पाद विभाग द्वारा की गई हालिया छापेमारी के बाद विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. उत्पाद विभाग ने खोखरोडीह, जड़ियाडीह, चाकुलिया और हमसदा टोला में छापेमारी कर पांच अवैध शराब अड्डों को ध्वस्त करने, करीब 1000 किलो जावा महुआ नष्ट करने और 50 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद करने का दावा किया है.


हालांकि इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि जिन गांवों में वर्षों से खुलेआम महुआ चुलाई शराब का कारोबार चल रहा था, वहां उत्पाद विभाग को अब जाकर जानकारी कैसे मिली. ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध शराब की भट्टियां एक-दो दिन में नहीं लगतीं, बल्कि लंबे समय से संचालित होती हैं और संबंधित विभागों को इसकी पूरी जानकारी रहती है.
लोगों का कहना है कि जब तक कथित “टोकन मनी” या अवैध वसूली का खेल चलता रहता है, तब तक कार्रवाई नहीं होती. जैसे ही यह सिलसिला रुकता है, विभाग छापेमारी शुरू कर देता है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि हर बार केवल भट्टियां तोड़ी जाती हैं, जावा महुआ नष्ट किया जाता है और शराब बहा दी जाती है, लेकिन असली संचालक और बड़े शराब कारोबारी विभाग की गिरफ्त से बाहर क्यों रहते हैं.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब आदिवासी और मजदूर तबके के लोगों को आगे कर असली शराब माफिया खुद को बचा लेते हैं. वहीं विभाग भी छोटे स्तर पर कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी पूरी करने का दावा करता है. जानकारों का मानना है कि प्रशासनिक मिलीभगत के बिना गांवों में खुलेआम अवैध शराब का कारोबार संभव नहीं है. महुआ चुलाई, सप्लाई और बिक्री का पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय रहता है, लेकिन बड़े नेटवर्क पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है. लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि उत्पाद विभाग वास्तव में अवैध शराब के खिलाफ गंभीर है, तो शराब माफियाओं की संपत्ति जब्त क्यों नहीं की जाती. उनके खिलाफ गैंगस्टर जैसी सख्त धाराएं क्यों नहीं लगाई जातीं.
उत्पाद अधीक्षक क्षितिज विजय मिंज के नेतृत्व में चल रही कार्रवाई को विभाग बड़ी उपलब्धि बता रहा है, लेकिन क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार अब भी जारी रहने के आरोप लग रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक असली नेटवर्क और संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी छापेमारी केवल कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या उत्पाद विभाग वास्तव में अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाना चाहता है, या फिर यह कार्रवाई केवल दिखावे और दबाव बनाने तक सीमित है.
Report- Afroz Mallik

