सरायकेला- खरसावां: जिले में निजी विद्यालयों की मनमानी पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है. मंगलवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में जिला स्तरीय शुल्क निर्धारण समिति की पहली बैठक समाहरणालय सभागार में आयोजित हुई, जिसमें फीस नियंत्रण, पारदर्शिता और छात्र सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्णय लिए गए.

बैठक में तय किया गया कि सभी निजी विद्यालय अब अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही फीस बढ़ा सकेंगे. इससे अधिक बढ़ोतरी के लिए जिला स्तरीय समिति की पूर्व अनुमति अनिवार्य होगी. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि एक बार फीस बढ़ोतरी होने के बाद कम से कम दो वर्षों तक दोबारा वृद्धि नहीं की जा सकेगी.
प्रशासन ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया कि वे पिछले तीन शैक्षणिक सत्रों और सत्र 2026- 27 की कक्षावार फीस का पूरा ब्योरा एक सप्ताह के भीतर जिला समिति को उपलब्ध कराएं. बिना अनुमति किसी भी प्रकार की अतिरिक्त या छिपी हुई फीस वसूली पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है.
अभिभावकों को राहत देते हुए यह भी साफ किया गया कि किसी भी स्कूल द्वारा किताब, कॉपी या यूनिफॉर्म के लिए किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा. साथ ही प्रवेश या पुनः नामांकन के नाम पर अवैध वसूली पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी.
बैठक में हर निजी विद्यालय में शुल्क समिति और अभिभावक- शिक्षक संघ (PTA) का गठन अनिवार्य किया गया है. इन समितियों की जानकारी स्कूल की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर सार्वजनिक करनी होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे.
छात्रों की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. निर्देश दिया गया कि स्कूल वाहनों में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने पर कार्रवाई होगी. सभी स्कूलों को परिवहन और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने और बाहरी वाहनों की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है.
इसके अलावा “राइट टू एजुकेशन एक्ट” के तहत पात्र बच्चों का नामांकन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया. उपायुक्त ने साफ कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी विद्यालयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और अभिभावकों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि निजी विद्यालय इन निर्देशों का कितना पालन करते हैं.

