सरायकेला: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी अधिसूचना संख्या 04/2026 के तहत सुरेशधारी को सरायकेला- खरसावां जिला का प्रभारी नियुक्त किया गया है. यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब जिले में कांग्रेस लगातार अपने जनाधार को बचाने और संगठन को मजबूत करने की चुनौती से जूझ रही है.

नियुक्ति के बाद सुरेशधारी ने कहा कि वे हमेशा पार्टी के सिपाही के रूप में कार्य करते रहे हैं और आगे भी पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे. उन्होंने संकेत दिया कि उनकी पहली प्राथमिकता संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना और कार्यकर्ताओं को एकजुट करना होगा.
क्यों अहम मानी जा रही है यह नियुक्ति
सरायकेला- खरसावां जिला राजनीतिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है. यहां आदिवासी, मूलवासी, मजदूर और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े मतदाताओं की बड़ी संख्या है. एक समय कांग्रेस का इन वर्गों में मजबूत प्रभाव था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है. इसका बड़ा कारण स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक निष्क्रियता, गुटबाजी और लगातार कार्यकर्ताओं का दूसरी पार्टियों की ओर झुकाव माना जाता रहा है.
ऐसे में सुरेशधारी की नियुक्ति को संगठन में नई ऊर्जा भरने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि वे कार्यकर्ताओं और नेतृत्व के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर पाएंगे.
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौतियां
सरायकेला- खरसावां में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बूथ स्तर तक सक्रिय संगठन तैयार करना है. वर्तमान समय में भाजपा, झामुमो और अन्य क्षेत्रीय दलों की तुलना में कांग्रेस की जमीनी सक्रियता कमजोर मानी जा रही है. कई इलाकों में पार्टी की मौजूदगी केवल चुनावी समय तक सीमित दिखाई देती है.
इसके अलावा युवाओं और नए मतदाताओं के बीच कांग्रेस की पकड़ पहले जैसी मजबूत नहीं रही. सोशल मीडिया और स्थानीय जनसंपर्क के मोर्चे पर भी पार्टी को लगातार मेहनत करने की जरूरत महसूस की जा रही है.
क्या सुरेशधारी बदल पाएंगे समीकरण ?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि सुरेशधारी लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहते हैं, कार्यकर्ताओं के बीच संवाद बढ़ाते हैं और स्थानीय मुद्दों को लेकर आक्रामक भूमिका निभाते हैं, तो कांग्रेस को कुछ हद तक फायदा मिल सकता है. हालांकि केवल नियुक्तियां करने से संगठन मजबूत नहीं होगा. इसके लिए गांव स्तर तक सक्रिय टीम, नियमित जनसंपर्क अभियान और स्थानीय समस्याओं पर आंदोलनकारी भूमिका जरूरी होगी. फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की कोशिश शुरू हो चुकी है. अब देखना होगा कि यह बदलाव कागजों तक सीमित रहता है या जमीन पर भी असर दिखाता है.



