रांची: झारखंड राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक हलचल उस समय तेज हो गई जब निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवाणी के नामांकन पत्र पर तकनीकी आपत्तियां दर्ज कराई गईं. मंगलवार को विधानसभा सचिवालय में नामांकन पत्रों की जांच के दौरान कांग्रेस और झामुमो ने नाथवाणी के नामांकन को लेकर कई सवाल उठाए, जिसके बाद निर्वाचन पदाधिकारी ने मामले पर अंतिम फैसला बुधवार तक के लिए टाल दिया.


सूत्रों के अनुसार इंडिया गठबंधन की ओर से नामांकन पत्र में दस्तावेजों के बीच नाम की प्रविष्टि में अंतर और चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित एक अनिवार्य कॉलम के अभाव को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई. इन आपत्तियों के बाद राज्यसभा चुनाव का मुकाबला अचानक राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है.
मामले की गंभीरता को देखते हुए परिमल नाथवाणी स्वयं विधानसभा सचिवालय पहुंचे और भाजपा नेताओं व अपने समर्थकों के साथ मिलकर सभी बिंदुओं पर स्पष्टीकरण दिया. उनके पक्ष का दावा है कि नामांकन पूरी तरह वैध है और उठाई गई आपत्तियों का संतोषजनक जवाब दे दिया गया है.
दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और झामुमो प्रत्याशी बैजनाथ राम के नामांकन पत्रों को जांच के बाद वैध घोषित कर दिया गया है. ऐसे में अब पूरी राजनीतिक नजरें परिमल नाथवाणी के नामांकन पर निर्वाचन पदाधिकारी के फैसले पर टिकी हुई हैं.
यदि नामांकन वैध घोषित होता है तो मुकाबला त्रिकोणीय स्वरूप ले सकता है, जबकि नामांकन खारिज होने की स्थिति में राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक गणित पूरी तरह बदल सकती है. बुधवार सुबह 11 बजे आने वाला फैसला झारखंड की राजनीति में नई दिशा तय कर सकता है.
Edited By Sarita Mahato

