आदित्यपुर: नगर निगम की चौथी बोर्ड बैठक आगामी 25 जुलाई को प्रस्तावित है, लेकिन बैठक से पहले ही नगर निगम की राजनीति गर्मा गई है. बोर्ड बैठक के एजेंडे को लेकर कई पार्षदों में नाराजगी की चर्चा है. सूत्रों के अनुसार इस बार की बैठक हंगामेदार हो सकती है.



बताया जा रहा है कि कई जनप्रतिनिधियों की नाराजगी का मुख्य कारण बोर्ड बैठक का एजेंडा तय करने में पार्षदों से व्यापक विचार-विमर्श नहीं होना और पूर्व की बैठकों में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की समीक्षा को शामिल नहीं किया जाना है. इसे लेकर अंदरखाने असंतोष बढ़ने की बात कही जा रही है.
जारी एजेंडे में संविदा कर्मी चैतन्य सिंह मुंडा के सेवा विस्तार, अनंजय कुमार के मानदेय में वृद्धि तथा अन्य संविदाकर्मियों को नियमित करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने जैसे विषय शामिल किए गए हैं. वहीं, कई पार्षदों का मानना है कि शहर से जुड़े बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए थी.
चर्चा यह भी है कि पार्षदों के मानदेय एवं पेट्रोल भत्ते में वृद्धि, वार्डों की सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, फॉगिंग, कचरा प्रबंधन, सफाई कर्मियों के मानदेय एवं नियमितीकरण तथा लंबित विकास योजनाओं जैसे विषय एजेंडे में शामिल नहीं किए गए हैं. इन मुद्दों को लेकर पार्षदों के बीच असंतोष की चर्चा है.
आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में सफाई व्यवस्था, नालियों की स्थिति, खराब सड़कें, बंद स्ट्रीट लाइट और ठोस कचरा प्रबंधन जैसी समस्याओं को लेकर समय-समय पर स्थानीय लोग आवाज उठाते रहे हैं. वहीं, करीब 392 करोड़ रुपये की आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति परियोजना भी वर्षों से अधूरी है और इसे लेकर भी जनप्रतिनिधियों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं.
सूत्रों की मानें तो कुछ पार्षद चाहते हैं कि बोर्ड बैठक में सबसे पहले पूर्व में पारित प्रस्तावों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए और उसके बाद नए एजेंडे पर चर्चा हो. हालांकि, इस संबंध में नगर निगम प्रशासन या मेयर की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
अब सबकी निगाहें 25 जुलाई को होने वाली बोर्ड बैठक पर टिकी हैं. यह देखना दिलचस्प होगा कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न होती है या फिर एजेंडे को लेकर पार्षदों का विरोध हावी रहता है.





