गम्हरिया: स्वर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना के गंजिया स्थित किसान प्रशिक्षण भवन में खरकई लिफ्ट सिंचाई योजना के तहत जल उपयोक्ता समिति के गठन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. एक तरफ ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों पर मनमाने तरीके से पूर्व निर्धारित समिति की घोषणा करने का आरोप लगाते हुए समिति को भंग कर ग्रामसभा के माध्यम से दोबारा पारदर्शी चयन कराने की मांग की है. वहीं विभाग का कहना है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रत्येक पांच हेक्टेयर कृषि क्षेत्र से प्रतिनिधियों का चयन कर समिति गठित की गई है.


मुखिया सुखदेव सरदार ने आरोप लगाया कि समिति गठन की जानकारी मिलने पर ग्रामीण किसान भवन पहुंचे, लेकिन वहां उनके सामने चयन प्रक्रिया पूरी कराने के बजाय पूर्व से तैयार समिति की घोषणा कर दी गई. इससे नाराज ग्रामीणों ने प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए प्रशिक्षण भवन से बाहर निकलकर विरोध जताया.
ग्रामीणों ने कहा कि यदि वर्तमान समिति को रद्द कर ग्रामसभा में पारदर्शी तरीके से पुनर्गठन नहीं किया गया तो वे पूरी प्रक्रिया और समिति का बहिष्कार करेंगे. विरोध में रूपेश सिंहदेव, श्यामापद गोराई, जुगल महतो, मंजूर बेसरा, गणेश गोराई समेत अन्य ग्रामीण शामिल थे.
वहीं विभागीय जानकारी के अनुसार खरकई लिफ्ट सिंचाई योजना के कमांड क्षेत्र में प्रत्येक पांच हेक्टेयर कृषि क्षेत्र से एक प्रतिनिधि का चयन किया गया. कुल 226 प्रतिनिधियों के चयन के बाद कार्यकारिणी समितियों का गठन किया गया, जिनका कार्यकाल तीन वर्ष होगा. गंजिया में 10 गांवों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में पर्वती सरदार को अध्यक्ष चुने जाने की जानकारी दी गई है.
ग्रामसभा की अध्यक्षता अधीक्षण अभियंता सह राज्य नोडल पदाधिकारी कुमार अरविन्द ने की थी. विभाग का कहना है कि समितियों के गठन का उद्देश्य जल वितरण और सिंचाई तंत्र के रखरखाव में किसानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है.
अब समिति गठन को लेकर विभाग के प्रक्रिया पूरी करने के दावे और ग्रामीणों के मनमानी के आरोप आमने- सामने हैं. ऐसे में ग्रामीणों की आपत्तियों पर विभाग आगे क्या निर्णय लेता है, इस पर निगाह रहेगी.

