सरायकेला: जमशेदपुर के युवा कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड की जांच अब एक और महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है. मामले में गिरफ्तार रितेश सिंह, सुनील रजक और अंकित सिंह को चांडिल अनुमंडल न्यायालय ने पुलिस को तीन दिनों के रिमांड पर दिया है. अब पुलिस तीनों से अलग- अलग और आमने- सामने पूछताछ कर हत्या की साजिश, शूटरों की भूमिका, फंडिंग, रेकी और वारदात से पहले तथा बाद में आरोपियों के मूवमेंट की बची हुई कड़ियों को जोड़ने का प्रयास करेगी.


उल्लेखनीय है कि निखार सबलोक की 24 अगस्त को चांडिल थाना क्षेत्र के आसनबनी स्थित टेंथ माइल स्टोन के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. निखार के पिता संजीव सबलोक की शिकायत पर चांडिल थाना कांड संख्या 115/2026 दर्ज किया गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोल्हान डीआईजी के निर्देश पर सरायकेला- खरसावां और पूर्वी सिंहभूम पुलिस की संयुक्त SIT गठित की गई थी. पुलिस ने इस मामले में अशोक कुमार सिंह उर्फ़ राघव, सुनील रजक, रितेश सिंह, सुशील केराई, राजकुमार सिंह उर्फ प्रिंस सिंह और अंकित सिंह को गिरफ्तार किया था.
रितेश और सुनील की भूमिका पर पुलिस का खास फोकस
पुलिस के पूर्व खुलासे के मुताबिक वारदात में इस्तेमाल लाल रंग की हुंडई i10 कार की भूमिका जांच में महत्वपूर्ण रही है. पुलिस के अनुसार घटना के दिन कार सुनील रजक चला रहा था, जबकि रितेश सिंह उसके बगल वाली सीट पर मौजूद था. जांच के दौरान पुलिस ने उक्त कार को बरामद करने का भी दावा किया था. ऐसे में रिमांड के दौरान पुलिस यह जानने का प्रयास कर सकती है कि हत्या से पहले निखार की गतिविधियों की जानकारी किस तरह जुटाई गई, शूटरों तक सूचना किसने पहुंचाई, वारदात के लिए वाहन और अन्य संसाधनों की व्यवस्था किस स्तर पर हुई और हत्या के बाद आरोपियों के भागने का पूरा रूट क्या था.
अंकित से भी साजिश और नेटवर्क को लेकर पूछताछ
अंकित सिंह भी उन आरोपियों में शामिल है, जिन्हें पुलिस ने हत्याकांड के खुलासे के दौरान गिरफ्तार किया था. पुलिस ने मामले में हथियार, कारतूस, मोबाइल फोन और वारदात में प्रयुक्त वाहन बरामद करने का दावा किया है. पुलिस के आधिकारिक खुलासे से जुड़ी रिपोर्टों में हत्या के पीछे जमीन विवाद और आपराधिक वर्चस्व के साथ 15 लाख रुपये की सुपारी का मामला सामने आया था. तीन दिनों के रिमांड के दौरान अंकित से उसकी कथित भूमिका के साथ यह पता लगाने का प्रयास किया जा सकता है कि वह साजिश में किस स्तर पर जुड़ा था और किन- किन लोगों के संपर्क में था.
मोबाइल और तकनीकी साक्ष्यों से कराया जा सकता है सामना
इस हत्याकांड की जांच में CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की अहम भूमिका रही है. शुरुआती जांच में CCTV के आधार पर संदिग्धों की पहचान की दिशा में पुलिस आगे बढ़ी थी. अब रिमांड के दौरान तीनों आरोपियों के बयानों का कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, CCTV फुटेज और अब तक गिरफ्तार अन्य आरोपियों से मिली जानकारियों से मिलान किया जा सकता है. बयानों में विरोधाभास मिलने पर तीनों को आमने- सामने बैठाकर पूछताछ भी जांच के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है.
सिंटू की भूमिका से भी जोड़ी जाएंगी कड़ियां
इस बीच हत्याकांड से जुड़े अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आ चुकी है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. जांच में निखार की हत्या से पहले करीब एक सप्ताह तक रेकी किए जाने की बात भी सामने आई है. ऐसे में रितेश, सुनील और अंकित से होने वाली पूछताछ के दौरान सिंटू तथा अन्य आरोपियों से जुड़े तथ्यों का मिलान भी जांच की महत्वपूर्ण कड़ी बन सकता है. साथ ही अशोक सिंह राघव द्वारा दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह के ईशारे पर निखार की हत्या कराए जाने के बयान की भी जांच हो सकती है.
तीन दिन की पूछताछ से खुल सकती हैं और परतें
पुलिस के लिए यह रिमांड इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि निखार सबलोक हत्याकांड में कई स्तरों पर साजिश की बात सामने आई है. पुलिस अब तक गिरफ्तारी और बरामदगी के जरिए कई कड़ियां जोड़ चुकी है, लेकिन पूरी साजिश में किस आरोपी की क्या भूमिका थी, शूटरों तक निर्देश कैसे पहुंचे और हत्या के पहले तथा बाद में किसने किस स्तर पर मदद की, इन सवालों के जवाब जांच के अगले चरण के लिए अहम होंगे. तीन दिनों की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद रितेश सिंह, सुनील रजक और अंकित सिंह को दोबारा न्यायालय में पेश किया जाएगा. फिलहाल पुलिस की कोशिश पूछताछ के जरिए निखार सबलोक हत्याकांड की शेष कड़ियों को जोड़ने और साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट करने की होगी.

