सरायकेला: एक तरफ सरायकेला- खरसावां के पुलिस अधीक्षक जिले में अपराध पर अंकुश लगाने और कानून- व्यवस्था मजबूत करने की मुहिम में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिला पुलिस के एक बड़े अधिकारी और उनके रीडर की कार्यशैली को लेकर सामने आए गंभीर आरोप पुलिस की छवि और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं. आरोप है कि स्थानीय थाना पुलिस को सूचना दिए बगैर स्क्रैप टाल, शराब कारोबार से जुड़े लोगों और पुराने आपराधिक मामलों में शामिल रहे व्यक्तियों के यहां दबिश देकर कथित रूप से पैसे की मांग की जा रही है. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. बावजूद इसके महाअष्टमी की रात आदित्यपुर थाना क्षेत्र में हुई एक कथित कार्रवाई का पूरा घटनाक्रम जांच की मांग जरूर करता है.


तीन पेटी शराब मिली तो आखिर दर्ज क्यों नहीं हुआ मामला ?
आरोप के मुताबिक महाअष्टमी की रात आदित्यपुर थाना क्षेत्र में पेप्सी कंपनी के सामने स्थित एक झोपड़ीनुमा होटल में दबिश दी गई. वहां से कथित तौर पर आरसी ब्रांड की तीन पेटी अंग्रेजी शराब बरामद की गई और होटल संचालक राम रतन मिश्रा को हिरासत में लिया गया. बताया जा रहा है कि कार्रवाई करने वालों ने शराब के नकली होने की बात कही. इस पर राम रतन मिश्रा ने दावा किया कि शराब उसने श्रीडुंगरी स्थित काउंटर से खरीदी थी.
यहीं से कई सवाल खड़े होते हैं. यदि बरामद शराब नकली होने का संदेह था तो उसका नमूना जांच के लिए भेजा गया या नहीं ? जिस काउंटर से शराब खरीदने की बात कही गई, उसकी जांच हुई या नहीं ? तीन पेटी शराब की जब्ती सूची बनी या नहीं ? शराब किस मालखाने में जमा की गई और यदि कोई अपराध बनता था तो प्राथमिकी क्यों नहीं दर्ज हुई ?
आदित्यपुर से हिरासत, फिर आरआईटी थाना क्यों ?
आरोप है कि होटल संचालक को आदित्यपुर थाना क्षेत्र से हिरासत में लेने के बाद आरआईटी थाना ले जाया गया और पूरी रात वहीं रखा गया. वहां शराब दुकान के कर्मचारी मुन्ना यादव को भी बुलाया गया जब वह शराब असली होने की बात कहकर अड़ गया तब उसे छोड़ दिया गया और राम रतन मिश्रा को डिटेन कर लिया गया. उसके बाद पूरी रात जो हुआ उसने पुलिस के माथे पर एक ऐसा कलंक लगा दिया जो हाल के दिनों में सरायकेला में नहीं हुआ है. दावा है कि इसी दौरान कथित तौर पर पैसे को लेकर बातचीत हुई. आरोप के मुताबिक शुरुआत 30 हजार रुपये से हुई और अंततः 15 हजार रुपये तथा तीन पेटी शराब पर मामला समाप्त करने की कथित सहमति बनी. अगले दिन सुबह राम रतन मिश्रा को उसके घर ले जाकर पत्नी के सामने छोड़ दिया गया और प्रमाण के तौर पर तस्वीर भी ली गई.
यदि यह घटनाक्रम सही है तो सवाल गंभीर हैं. किसी व्यक्ति को पूरी रात थाने में रखने का आधार क्या था ? हिरासत अथवा थाने में उसकी मौजूदगी की आधिकारिक प्रविष्टि हुई या नहीं ? यदि 15 हजार रुपये लिए गए तो किस मद में और उसकी रसीद कहां है ? इंडिया न्यूज़ वायरल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है. संबंधित अधिकारी, रीडर और पुलिस विभाग का पक्ष सामने आना आवश्यक है.
एसपी की मुहिम को मातहतों की कार्यशैली से न लगे धक्का
सरायकेला- खरसावां पुलिस अधीक्षक की ओर से अपराध नियंत्रण, अवैध कारोबार पर कार्रवाई और पुलिसिंग को प्रभावी बनाने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं. ऐसे में यदि उन्हीं के मातहत किसी अधिकारी और कर्मचारी पर वसूली जैसे आरोप सामने आते हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच पुलिस व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए जरूरी हो जाती है. आरोप सही हैं या गलत, इसका फैसला जांच से होना चाहिए. लेकिन ऐसे मामलों को अनदेखा करना भी उचित नहीं होगा. जरूरत है कि पुलिस अधीक्षक एवं पुलिस विभाग के वरीय अधिकारी पूरे घटनाक्रम की तह तक जाएं. आरआईटी थाने के सीसीटीवी फुटेज, स्टेशन डायरी, आगंतुक अथवा हिरासत संबंधी रिकॉर्ड, कथित शराब की जब्ती और मालखाना रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों की उस रात की गतिविधियों की जांच की जाए. इससे आरोपों की वास्तविकता सामने आ सकती है.
यदि आरोप निराधार निकलते हैं तो संबंधित पुलिसकर्मियों की स्थिति भी स्पष्ट होगी और यदि जांच में गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों को चिह्नित कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए.
आरआईटी थाना प्रभारी की मौजूदगी का दावा, उनकी भूमिका भी जांच का विषय
आरोप है कि कथित घटनाक्रम के दौरान आरआईटी थाना प्रभारी भी थाने में मौजूद थे. ऐसे में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि क्या उन्हें होटल संचालक को थाने लाए जाने की जानकारी थी ? यदि थी तो किस मामले में उसे रखा गया था और यदि नहीं थी तो थाना परिसर में पूरी रात किसी व्यक्ति को रखे जाने की स्थिति कैसे बनी ? क्या उन्होंने इसकी जानकारी भरी पदाधिकारी को दी ? यह भी आरोप है कि होटल संचालक को जिस वाहन से उठाया गया, उस पर पुलिस लिखा बोर्ड नहीं था. यह भी आरोप है कि महानवमी के दिन रीडर द्वारा होटल संचालक को मंथली रेट तय करने के लिए धमकाया गया है. आरोपों के मद्देनजर पूरे घटनाक्रम का आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना जरूरी है. इस पूरे मामले की जांच आवश्यक हो गई है क्योंकि क्षेत्र के शराब दुकानदारों और स्क्रैप टाल संचालकों में पुलिस के अधिकारी और उनके रीडर के व्यवहार को लेकर रोष व्याप्त है.
यह केवल शुरुआत ? अगली कड़ी में स्क्रैप टाल का मामला
सूत्रों का दावा है कि यह अकेला मामला नहीं है. संबंधित अधिकारी और उनके रीडर की कार्यशैली को लेकर स्क्रैप कारोबार से जुड़ा एक अन्य मामला भी सामने आने की बात कही जा रही है. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरायकेला- खरसावां पुलिस अपने ही तंत्र पर लगे इन गंभीर आरोपों की जांच कर तस्वीर साफ करेगी ? क्योंकि अपराध के खिलाफ अभियान की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी, जब पुलिस अपने भीतर उठने वाले सवालों की भी उतनी ही गंभीरता से जांच करे. अगली कड़ी में- स्क्रैप टाल से जुड़ा कथित मामला और वसूली के आरोपों की एक और कहानी…

