सरायकेला/ Pramod Singh नगर क्षेत्र में आस्था, तप और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी के आवास पर सोमवार को प्राचीन घटपाट परंपरा और चड़क पूजा का आयोजन किया गया.

इस दौरान गोरिया भार लेकर भोक्ताओं का पारंपरिक तरीके से आगमन हुआ. पूरे माहौल में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष संचार देखने को मिला. विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए.
नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि घटपाट परंपरा और चड़क पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि भैरव साधना के माध्यम से आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का सशक्त माध्यम है. यह परंपरा श्रद्धा, तप और अनुशासन की जीवंत मिसाल है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए है. उन्होंने बताया कि यह अनुष्ठान तेरह दिनों तक चलता है, जिसमें तेरह भोक्ता पूर्ण समर्पण और पवित्रता के साथ पूजा संपन्न करते हैं. “झर-झर झंडा” इस परंपरा का प्रमुख प्रतीक है, जिसके माध्यम से क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और अच्छी वर्षा की कामना की जाती है.
अध्यक्ष ने जानकारी दी कि भोक्ताओं का पुनः आगमन मंगलवार को निर्धारित है, जिसके लिए सभी तैयारियां पूरी की जा रही हैं.
उन्होंने कहा कि सरायकेला का चैत्र पर्व, छऊ नृत्य और ऐसे पारंपरिक अनुष्ठानों का संगम क्षेत्र की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है.

