सरायकेला/ Pramod Singh जिले में अवैध शराब के कारोबार को लेकर एक बार फिर उत्पाद विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है. स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है.

आरोप है कि उत्पाद विभाग चुनिंदा स्थानों पर ही छापेमारी करता है, जबकि पूरे जिले में अवैध चुलाई शराब का कारोबार खुलेआम जारी है.
ग्रामीणों का कहना है कि विभाग की कार्रवाई पूरी तरह पक्षपातपूर्ण नजर आती है. जहां से कथित तौर पर “टोकन मनी” नहीं मिलती, वहां लगातार छापेमारी की जाती है, जबकि जिन क्षेत्रों से नियमित लेन-देन होता है, वहां विभाग कार्रवाई से परहेज करता है.
स्थानीय लोगों के अनुसार जिले के अधिकांश गांवों और कस्बों में अवैध शराब का कारोबार तेजी से फैल चुका है. इसके बावजूद विभाग की कार्रवाई सीमित और दिखावटी मानी जा रही है. लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे खेल में विभाग के कर्मचारी से लेकर पदाधिकारी तक की संलिप्तता हो सकती है.
लोगों का कहना है कि यदि निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो अवैध शराब माफियाओं का बड़ा नेटवर्क उजागर हो सकता है. लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण यह कारोबार लगातार फल-फूल रहा है.
अवैध शराब का कारोबार न केवल सरकार को राजस्व का भारी नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है. पूर्व में जहरीली शराब से कई लोगों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं, इसके बावजूद ठोस कार्रवाई का अभाव चिंता का विषय बना हुआ है. इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. साथ ही अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर इस पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की गई है.
सरायकेला- खरसावां में अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल यह संकेत देते हैं कि व्यवस्था में कहीं न कहीं गंभीर खामियां मौजूद हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इन आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या इस अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लग पाता है या नहीं.

