सरायकेला: सरायकेला प्रखंड अंतर्गत ईटाकुदार पंचायत के सुरताडीह गांव में युवा संघ समिति सुरताडीह के तत्वावधान में भव्य छऊ महोत्सव का आयोजन किया गया. ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव ने क्षेत्र की लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को नई ऊर्जा प्रदान की. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं, महिलाओं और बुजुर्गों ने भाग लेकर छऊ नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आनंद लिया. देर रात शुरू हुआ यह आयोजन पूरी रात रंगारंग कार्यक्रमों के साथ चलता रहा और सुबह तक दर्शकों की भारी भीड़ बनी रही.


महोत्सव का उद्घाटन छोटादवना पंचायत के पूर्व उप मुखिया एवं समाजसेवी राजाराम महतो तथा सरायकेला प्रखंड के पूर्व उप प्रमुख नरेश महतो उर्फ माइकल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. इस दौरान अतिथियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया गया.
अपने संबोधन में राजाराम महतो ने कहा कि छऊ नृत्य केवल एक कला नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और पूर्वजों की अमूल्य धरोहर है. उन्होंने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में अनेक लोक कलाएं और पारंपरिक रीति-रिवाज विलुप्त होने के कगार पर पहुंच रहे हैं. ऐसे समय में युवाओं की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित और संवर्धित करें.

उन्होंने कहा कि पूर्वजों द्वारा संरक्षित संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का दायित्व आज की नई पीढ़ी पर है. यदि समाज अपनी जड़ों से कट जाएगा तो उसकी पहचान भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी. इसलिए ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर बढ़ावा देने की आवश्यकता है.
वहीं पूर्व उप प्रमुख नरेश महतो उर्फ माइकल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रम सामाजिक एकता को मजबूत करने का कार्य करते हैं. छऊ नृत्य और स्थानीय पर्व-त्योहार हमारी सांस्कृतिक समृद्धि एवं सामाजिक सौहार्द के प्रतीक हैं. इनके संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी समाज के प्रत्येक व्यक्ति की है.
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं. आज के युवाओं को मोबाइल और इंटरनेट की दुनिया के साथ-साथ अपनी लोक परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों को भी समझना चाहिए. यही हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक ताकत है.
महोत्सव के दौरान विभिन्न कलाकारों ने छऊ नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें दर्शकों ने खूब सराहा. पारंपरिक वेशभूषा, आकर्षक मुखौटे और लोक वाद्य यंत्रों की मधुर धुनों पर प्रस्तुत नृत्य ने पूरे वातावरण को सांस्कृतिक रंग में रंग दिया. कार्यक्रम स्थल पर मेले जैसा माहौल देखने को मिला, जहां आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे.
आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि आने वाले वर्षों में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन और अधिक भव्य रूप से किया जाएगा, ताकि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और मजबूत किया जा सके.
कार्यक्रम को सफल बनाने में युवा संघ समिति सुरताडीह के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही. इस अवसर पर कार्तिक महतो, फागु महतो, राजाराम महतो, मनोज महतो, कैलाश महतो, विकास महतो, झंटू महतो, सूरज महतो, सुबोध महतो, मिथुन तांती, लालचांद महतो, वासुदेव महतो, नीरज महतो, जितेन महतो, चंदन महतो, विक्रम महतो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित थे.
ग्रामीणों ने कहा कि छऊ महोत्सव जैसे आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने का एक सशक्त अभियान हैं. सुरताडीह में आयोजित यह महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और लोक परंपराओं के संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह



