सरायकेला: नगर पंचायत क्षेत्र में शुक्रवार शाम हुई हल्की बारिश के बाद बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई. शाम करीब 5 बजे से बाधित हुई बिजली आपूर्ति कई इलाकों में 14 से 15 घंटे तक बहाल नहीं हो सकी. भीषण गर्मी और उमस के बीच लंबी बिजली कटौती से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए.


स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश सामान्य थी और कहीं भी तेज आंधी-तूफान जैसी स्थिति नहीं बनी थी. इसके बावजूद पूरे नगर क्षेत्र में बिजली व्यवस्था घंटों तक ठप रहना विभागीय लापरवाही को दर्शाता है. लोगों का कहना है कि यदि प्राकृतिक आपदा या बड़े तकनीकी नुकसान की वजह से बिजली बाधित होती तो स्थिति समझी जा सकती थी, लेकिन हल्की बारिश के बाद पूरी रात अंधेरे में रहना चिंताजनक है.
नागरिकों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग मेंटेनेंस के नाम पर हर वर्ष लाखों रुपये खर्च करने का दावा करता है, लेकिन उसका असर जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं देता. लोगों के अनुसार हाल के वर्षों में लगाए गए कई केबल और उपकरण गुणवत्ता के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं. हल्की बारिश या सामान्य लोड बढ़ने पर भी केबल गर्म होकर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं. कई स्थानों पर केबल जलने और खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं.
बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ा. रातभर लोग गर्मी और उमस से परेशान रहे. बिजली नहीं रहने के कारण कई घरों में पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई क्योंकि मोटर और पंप बंद पड़े रहे. लंबे समय तक बिजली गुल रहने से इन्वर्टर और बैटरियां भी जवाब दे गईं.
लोगों का यह भी आरोप है कि बिजली आपूर्ति बाधित होने पर विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क करना मुश्किल हो जाता है. कई बार फोन बंद मिलते हैं या कॉल रिसीव नहीं किए जाते. वहीं बिजली बहाली को लेकर विभाग की ओर से कोई स्पष्ट सूचना या अपडेट भी उपलब्ध नहीं कराया जाता, जिससे आम लोगों की परेशानी और बढ़ जाती है.
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब हर साल बिजली व्यवस्था के रखरखाव और सुधार पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो फिर मामूली बारिश के बाद भी घंटों अंधेरे में रहने की नौबत क्यों आती है. लोगों ने बिजली आपूर्ति व्यवस्था की तकनीकी जांच कराने, जर्जर और खराब केबल बदलने तथा शिकायतों के त्वरित निपटारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.
नगर क्षेत्र के लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि बिजली व्यवस्था में जल्द सुधार नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह



