DESK REPORT झारखंड में अगले वर्ष प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर चुनावी गतिविधियां तेज होने लगी हैं. संभावना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य का पहला चुनाव नई मतदाता सूची के आधार पर कराया जाएगा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए-1 (Booth Level Agent-1) और बीएलए-2 (Booth Level Agent-2) अपनी जिम्मेदारियों का गंभीरता से निर्वहन कर रहे हैं ?



सभी जिले में SIR अभियान तेजी से चल रहा है. घर- घर सत्यापन, गणना प्रपत्रों का संग्रह, डिजिटाइजेशन और ASDD (Absent, Shifted, Dead & Duplicate) सूची तैयार करने का कार्य जारी है. हालांकि अंतिम सूची प्रकाशित होने से पहले यह स्पष्ट नहीं है कि कितने मतदाताओं के नाम हटेंगे. विभिन्न स्तरों पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित हो सकते हैं. हालांकि करीब 35 प्रतिशत नाम कटने संबंधी दावे की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
चुनाव प्रक्रिया में बीएलए की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. उनका दायित्व अपने- अपने बूथ क्षेत्र के मतदाताओं का सत्यापन, पात्र मतदाताओं के नाम छूटने से बचाना, त्रुटियों की जानकारी निर्वाचन अधिकारियों तक पहुंचाना तथा दावा- आपत्ति की प्रक्रिया में मतदाताओं की सहायता करना है.
जानकारों का मानना है कि यदि राजनीतिक दलों के बीएलए-1 और बीएलए-2 सक्रिय नहीं रहे तो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के अनेक पात्र मतदाताओं के नाम सूची से छूट सकते हैं. इससे पंचायत चुनाव के दौरान व्यापक असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करना केवल निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी नहीं है. इसमें राजनीतिक दलों और उनके अधिकृत प्रतिनिधियों की भी समान भागीदारी होती है. यदि समय रहते सत्यापन और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग नहीं दिया गया, तो बाद में मतदाता सूची को लेकर विवाद और आरोप-प्रत्यारोप बढ़ सकते हैं.
निर्वाचन आयोग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यदि किसी पात्र मतदाता का नाम प्रारूप मतदाता सूची या ASDD सूची में शामिल हो जाता है, तो निर्धारित अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा एवं आपत्ति प्रस्तुत कर नाम पुनः शामिल कराया जा सकता है. इसलिए राजनीतिक दलों, बीएलए और मतदाताओं सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक मानी जा रही है.
झारखंड में पंचायत चुनाव से पहले SIR की प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है. ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजनीतिक दल अपने बूथ स्तर के नेटवर्क को कितना सक्रिय करते हैं और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा में कितनी प्रभावी भूमिका निभाते हैं.





