सरायकेला: झारखंड में छात्र हित, नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच और शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बुधवार को राज्यभर में धरना-प्रदर्शन का आह्वान किया गया था. इसी क्रम में सरायकेला-खरसावां जिला भाजपा की ओर से उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय के समक्ष धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया.


कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू समेत पार्टी के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे, लेकिन इसके बावजूद सरायकेला में अपेक्षित संख्या में कार्यकर्ता नहीं जुट सके. सीमित भीड़ को लेकर अब राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है.
नौकरी हमारा अधिकार के नारों के बीच प्रदर्शन
भाजपा कार्यकर्ताओं ने नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच कराने और आंदोलनरत छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. इस दौरान “नौकरी हमारा अधिकार, घोटाले की सीबीआई जांच करो” और “फर्जी मुकदमे वापस लो” जैसे नारे लगाए गए.
पार्टी की ओर से कार्यक्रम को लेकर जोरदार तैयारी का दावा किया गया था, लेकिन मौके पर अपेक्षित भीड़ नहीं दिखाई दी. इससे जिला संगठन की तैयारियों और कार्यकर्ताओं की सक्रियता को लेकर सवाल उठने लगे.
प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी के बावजूद कम रही भीड़
कार्यक्रम का सबसे चर्चित पहलू यह रहा कि प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की मौजूदगी के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की भागीदारी नहीं हो सकी. इसे लेकर भाजपा के अंदर भी तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी हैं.
कार्यकर्ताओं के एक वर्ग के बीच सरायकेला-खरसावां भाजपा में कथित अंदरूनी खींचतान और गुटबाजी की चर्चा भी सुनने को मिली. कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि संगठन के भीतर चल रही कथित नाराजगी का असर सार्वजनिक कार्यक्रमों की भागीदारी पर पड़ सकता है.
हालांकि, गुटबाजी या संगठनात्मक असंतोष को लेकर जिला भाजपा के किसी अधिकृत पदाधिकारी की स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसलिए इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
छात्र मुद्दे पर संदेश देने की कोशिश
भाजपा का यह प्रदर्शन राज्य सरकार के खिलाफ छात्र हित और नियुक्ति परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था. पार्टी ने कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच और छात्रों पर दर्ज मुकदमों की वापसी को प्रमुख मुद्दा बनाया.
लेकिन सरायकेला में कार्यक्रम के दौरान अपेक्षाकृत कम भीड़ और संगठन के भीतर कथित खींचतान की चर्चाएं राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गईं.
अब संगठन के सामने चुनौती
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माने जा रहे इस कार्यक्रम में अपेक्षित भीड़ नहीं जुटना जिला भाजपा के लिए आत्ममंथन का विषय बन सकता है. सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संगठन आने वाले दिनों में कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने और कथित अंदरूनी मतभेदों को दूर करने के लिए कोई ठोस रणनीति तैयार करेगा.
फिलहाल भाजपा का यह प्रदर्शन छात्रों के मुद्दे को लेकर पार्टी के आंदोलन का हिस्सा रहा, लेकिन सरायकेला में कार्यक्रम की सीमित भागीदारी ने संगठन की जमीनी सक्रियता को लेकर नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है.
संपादक: प्रमोद सिंह

