चाईबासा/ सरायकेला: झारखंड में कमजोर पड़ चुका नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंचता नजर आ रहा है। हाल के दिनों में बड़े इनामी नक्सलियों की गिरफ्तारी के बाद अब संगठन से जुड़े नक्सली भी मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुन रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को कोल्हान पुलिस मुख्यालय में चार हार्डकोर नक्सलियों ने झारखंड सरकार की उग्रवादी आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के समक्ष हथियार डाल दिए।



आत्मसमर्पण करने वालों में दस लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर सालुका कयाम उर्फ भुवनेश्वर, एक लाख रुपये का इनामी कोदोमुनी कोड़ा, अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम और पिंकी शामिल हैं। आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने हथियार भी पुलिस को सौंपे।
इस मौके पर कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा, सीआरपीएफ चाईबासा के डीआईजी, पश्चिमी सिंहभूम एसपी अमित रेणु, सरायकेला- खरसावां एसपी मनोज स्वर्गियारी समेत चाईबासा और सरायकेला- खरसावां जिले के पुलिस पदाधिकारी तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों के अधिकारी मौजूद रहे।
पश्चिमी सिंहभूम में अब सक्रिय नक्सलियों का सफाया
पुलिस के अनुसार सालुका कयाम, कोदोमुनी कोड़ा और पिंकी ने पश्चिमी सिंहभूम पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। पुलिस का दावा है कि पश्चिमी सिंहभूम में सक्रिय नक्सलियों के लिहाज से यह बड़ी उपलब्धि है और जिले में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान निर्णायक दौर में पहुंच गया है।

वहीं अनिता तामसोय उर्फ अनिता कयाम ने सरायकेला- खरसावां पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से जुड़ी थी।
करीब तीन दशक तक कोल्हान क्षेत्र नक्सलवाद के दंश से जूझता रहा है। इस दौरान पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कई अधिकारी एवं जवान शहीद हुए। सुरक्षाबलों के लगातार अभियान, खुफिया तंत्र की मजबूती और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती पुलिस पहुंच के बाद अब नक्सली संगठन लगातार कमजोर पड़ता जा रहा है।
चार वर्षों में 75 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण
पुलिस के मुताबिक पिछले चार वर्षों में 75 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं कई बड़े नक्सली गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कुछ मुठभेड़ों में मारे भी गए हैं। मिसिर बेसरा समेत कई हार्डकोर नक्सलियों की गिरफ्तारी को नक्सल संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि हथियार के बल पर किसी क्षेत्र में विकास संभव नहीं है। नक्सलवाद ने वर्षों तक ग्रामीणों के बीच भय का वातावरण पैदा किया और विकास की गति को प्रभावित किया। अब क्षेत्र को हिंसा से बाहर निकालकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ना प्राथमिकता है।
सरायकेला एसपी की दो टूक- या मुख्यधारा में लौटें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें
सरायकेला- खरसावां एसपी मनोज स्वर्गियारी ने कहा कि अब जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र में महज कुछ नक्सली ही बचे हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में लौटने की अपील की।
एसपी ने स्पष्ट संदेश दिया कि जो नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके पुनर्वास की व्यवस्था सरकार की नीति के तहत की जाएगी। लेकिन यदि वे हथियार नहीं छोड़ते हैं तो सुरक्षा बल उनके खिलाफ अभियान जारी रखेंगे।
शहीद जवानों को किया गया नमन
सीआरपीएफ के डीआईजी ने कोल्हान में पिछले करीब तीन दशकों से चले नक्सल विरोधी अभियान के दौरान शहीद हुए जवानों और अधिकारियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के अनेक जवानों और अधिकारियों ने अपनी शहादत देकर क्षेत्र को नक्सलवाद के प्रभाव से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि अब नक्सलवाद के कमजोर पड़ने के बाद नए कोल्हान के निर्माण का समय है। क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए प्रशासन, पुलिस, सुरक्षा बलों और आम लोगों को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
कोल्हान डीआईजी ने बताया ऐतिहासिक दिन
कोल्हान डीआईजी अनुरंजन किस्टोपा ने चार नक्सलियों के आत्मसमर्पण को नक्सल विरोधी अभियान के लिए महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने अभियान में सहयोग करने वाली केंद्रीय एजेंसियों, सुरक्षा बलों और पुलिस पदाधिकारियों के प्रति आभार जताया तथा नक्सल हिंसा के दौरान शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि बचे हुए नक्सलियों को भी हिंसा का रास्ता छोड़कर सरकार की आत्मसमर्पण नीति का लाभ उठाना चाहिए। साथ ही उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों और जवानों को आने वाली चुनौतियों के प्रति सतर्क रहने की हिदायत दी।
डीआईजी ने कहा कि नक्सलवाद के दोबारा पैर पसारने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस को ग्रामीणों और आम जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना होगा। जनता का विश्वास ही नक्सलवाद के खिलाफ सबसे मजबूत हथियार है।
उन्होंने बताया कि फिलहाल असीम मंडल का दस्ता ही प्रमुख रूप से सक्रिय बचा है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए सुरक्षा बल लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने असीम मंडल समेत उसके दस्ते में शामिल नक्सलियों से भी अपील की कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।
चार हार्डकोर नक्सलियों का एक साथ हथियार डालना कोल्हान में दशकों से चले आ रहे नक्सल विरोधी अभियान के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब सुरक्षा बलों के सामने चुनौती केवल बचे हुए नक्सलियों को पकड़ना नहीं, बल्कि नक्सल प्रभाव से मुक्त हो चुके इलाकों में स्थायी शांति, ग्रामीणों का विश्वास और विकास की मजबूत जमीन तैयार करना भी है।





