गम्हरिया: टाटा लॉन्ग प्रोडक्ट्स से संबंधित कॉलोनी में लंबे समय से इस्तेमाल किए जा रहे पैदल आवागमन मार्ग को बंद किए जाने की कथित तैयारी का विरोध शुरू हो गया है. टायो संघर्ष समिति के संयोजक अजय कुमार शर्मा ने सरायकेला- खरसावां उपायुक्त को आवेदन देकर पूरे मामले की प्रशासनिक और राजस्व जांच कराने तथा जांच पूरी होने तक मार्ग पर यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है.


आवेदन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, सरायकेला अनुमंडल पदाधिकारी, गम्हरिया के अंचल अधिकारी और थाना प्रभारी को भी दी गई है. शर्मा का दावा है कि संबंधित रास्ते का इस्तेमाल कॉलोनीवासियों, कर्मचारियों और आसपास के लोगों द्वारा वर्ष 1968 से किया जा रहा है. ऐसे में बिना अभिलेखों की जांच और संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर दिए रास्ता बंद नहीं किया जाना चाहिए.
NCLAT के आदेश को लेकर भी उठाया सवाल
आवेदन में 30 जनवरी 2025 के NCLAT के एक आदेश का उल्लेख करते हुए दावा किया गया है कि उसका संबंध मुख्य रूप से रिजॉल्यूशन प्लान और लीज में संशोधन से था. आवेदनकर्ता के अनुसार उपलब्ध आदेश में कॉलोनी के इस पैदल मार्ग को बंद करने का कोई विशिष्ट निर्देश नहीं है. उन्होंने प्रशासन से मूल आदेश और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है. साथ ही भारतीय सुखाचार अधिनियम, 1882 की धारा 15 का उल्लेख करते हुए लंबे समय से रास्ते के उपयोग से जुड़े अधिकार का सवाल उठाया गया है. हालांकि किसी रास्ते पर ऐसा कानूनी अधिकार वास्तव में स्थापित होता है या नहीं, यह भूमि के स्वामित्व, उपयोग की प्रकृति, अनुमति और अन्य अभिलेखों की जांच पर निर्भर करेगा.
नक्शा, लीज और राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग
आवेदन में प्रशासन से स्थल निरीक्षण कराने के साथ संबंधित भूमि के खाता-प्लॉट, जमाबंदी, नक्शा, लीज डीड और कॉलोनी के स्वीकृत नक्शे की जांच कराने की मांग की गई है. पुराने कर्मचारियों और स्थानीय निवासियों से भी रास्ते के इस्तेमाल के संबंध में जानकारी लेने का आग्रह किया गया है. अजय कुमार शर्मा ने कहा है कि उनका उद्देश्य कंपनी अथवा किसी अधिकारी से व्यक्तिगत विवाद करना नहीं, बल्कि मामले का शांतिपूर्ण और विधिसम्मत समाधान कराना है. उन्होंने आशंका जताई है कि लंबे समय से इस्तेमाल हो रहे रास्ते को अचानक बंद किए जाने से स्थानीय स्तर पर असंतोष पैदा हो सकता है. फिलहाल टाटा लॉन्ग प्रोडक्ट्स अथवा संबंधित प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आया है. प्रशासनिक जांच के बाद ही संबंधित मार्ग की वास्तविक कानूनी और राजस्व स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.

