सरायकेला: 13 अगस्त से कांड्रा थाना अंतर्गत पिंडरा बेड़ा निवासी राहुल हांसदा और खरसावां निवासी तपन प्रधान के अपहरण और दोनों की हत्या की कहानी अब रपचा के जंगल से निकलकर जनता के जेहन में उतर रही है. साथ ही पुलिस के विश्वसनीयता को कटघरे में खड़ा कर रही है. पुलिस ने रविवार को गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों फूलचंद हांसदा और रविंद्र मार्डी को भले सलाखों के पीछे भेज दिया है मगर इस सनसनीखेज वारदात में कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब पुलिस की कार्रवाई से नहीं मिल पाया है. और यही सवाल इस पूरे मामले को सिर्फ हत्या का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े रहस्य में बदल रहे हैं.


13 अगस्त- जब तीन युवक निकले थे और दो लौटकर नहीं आए
13 अगस्त की रात राहुल हांसदा, तपन प्रधान और उनका साथी सूरज हांसदा धातकीडीह स्कूल के पास थे. परिजनों के अनुसार इसी दौरान कुछ लोग वहां पहुंचे और तीनों को अपने साथ ले गए. मारपीट की गई और उन्हें गम्हरिया की ओर ले जाया गया. सूरज को मारपीट के बाद छोड़ दिया गया लेकिन राहुल और तपन नहीं लौटे.
उस रात से दोनों परिवारों की जिंदगी बदल गई
परिजन थाने का चक्कर लगाते रहे. अपने बेटों को खोजने की गुहार लगाते रहे. लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने समय पर शिकायत दर्ज नहीं की. करीब एक सप्ताह तक दो परिवार इंतजार करते रहे. फिर रपचा के जंगल से दो शव मिले.
जिस खबर को हमने उठाया, पुलिस ने उसकी एक कड़ी की पुष्टि कर दी
इंडिया न्यूज वायरल बिहार-झारखंड ने सूत्रों के हवाले से सरना उमूल सामुदायिक भवन में दोनों युवकों के साथ मारपीट किए जाने की खबर प्रकाशित की थी. रविवार को फूलचंद हांसदा और रविंद्र मार्डी को पूछताछ के बाद न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जब अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अनुभव भारद्वाज से मीडिया ने बात की, तो उन्होंने सरना उमूल के समीप दोनों युवकों के साथ मारपीट होने की पुष्टि की. यानी जिस जगह को लेकर पहले सिर्फ सवाल और सूत्रों की जानकारी थी, अब पुलिस ने भी उस स्थान पर मारपीट होने की बात स्वीकार की है.
लेकिन यहीं से सवाल खत्म नहीं होते, बल्कि सवाल और बड़े हो जाते हैं.
• आखिर अपहरण हुआ कैसे ?
• एसडीपीओ ने मारपीट की पुष्टि की.
• लेकिन यह नहीं बताया कि राहुल और तपन को धातकीडीह से सरना उमूल तक कैसे लाया गया ?
• किस वाहन का इस्तेमाल हुआ ?
• वाहन किसके नाम पर है ?
• उस रात वाहन में कौन-कौन लोग थे ?
परिजनों के अनुसार तीनों युवकों को उठाने में एक बोलेरो और एक लाल रंग की कार का इस्तेमाल किया गया था. राहुल हांसदा की मां का दावा है कि उसके बेटे को उठाने के दौरान करीब सात-आठ युवक मौजूद थे. अगर यह दावा जांच में सही निकलता है, तो फिर सवाल सीधा है.
• सात- आठ लोग कहां गए ?
• दो वाहन कहां हैं ?
• बोलेरो किसकी थी ?
• स्विफ्ट किसकी थी ?
और सबसे बड़ा सवाल.
• क्या पुलिस ने इन दोनों वाहनों की तलाश की है ?
• पुलिस के हाथ में फिलहाल क्या आया ?
पुलिस ने घटना में प्रयुक्त एक डंडा और दो मोबाइल फोन बरामद किए जाने की बात कही है. लेकिन जिस मामले में तीन युवकों को कथित तौर पर उठाया गया, दो की मौत हो गई और एक युवक किसी तरह बचकर निकला, वहां क्या सिर्फ एक डंडा और दो मोबाइल फोन से पूरी कहानी सामने आ पाएगी ?
• मोबाइल की लोकेशन क्या कहती है ?
• किस-किस नंबर पर बातचीत हुई ?
• 13 अगस्त की रात आरोपियों के मोबाइल कहां थे ?
• दोनों वाहनों की लोकेशन क्या थी ?
इन सवालों के जवाब जांच को बहुत आगे ले जा सकते हैं.
सरना उमूल पर सबसे बड़ा सवाल
सरना उमूल सामुदायिक भवन कोई सुनसान जगह नहीं है. यहां लगातार लोगों की आवाजाही रहती है. स्थानीय स्तर पर एक खास राजनीतिक दल के नेताओं की बैठकी भी होती रही है. और अब पुलिस खुद कह रही है कि दोनों युवकों के साथ इसी स्थान के समीप मारपीट हुई थी. जबकि हमारे सूत्र दावा कर रहे हैं कि तीनों युवकों को सरना उमुल लाकर पीटा गया. सूरज हांसदा को मारपीटकर छोड़ दिया गया जबकि राहुल हांसदा और तपन प्रधान की हत्या कर शव को रपचा के जंगल में लेजाकर दफना दिया गया.
तो फिर सवाल बेहद स्वाभाविक है
• करीब दस दिनों तक यह मामला चर्चा में रहा. अगर राहुल और तपन को वहां लाया गया था, उनके साथ मारपीट हुई थी, तो वहां आने- जाने वाले लोगों को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई ?
• अगर किसी को जानकारी हुई थी, तो पुलिस को क्यों नहीं बताया गया ?
• परिजनों को सूचना क्यों नहीं मिली ?
• और अगर किसी ने देखा था, तो अब तक सामने क्यों नहीं आया ?
• क्या किसी ने चुप्पी साध ली थी ?
• या फिर पुलिस को पूरी जानकारी अभी तक नहीं मिल पाई है ?
• राजनीति का सवाल भी क्यों उठ रहा है ?
• इस मामले में स्थानीय स्तर पर राजनीतिक हस्तक्षेप की चर्चाएं भी हैं.
हालांकि, किसी राजनीतिक व्यक्ति की भूमिका को लेकर अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और बिना जांच किसी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा. लेकिन जब घटना का एक महत्वपूर्ण स्थान राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की बैठकी वाला बताया जाता है, जब परिजन कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाते हैं और जब घटना के करीब एक सप्ताह बाद शव बरामद होते हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है.
पुलिस को इन सवालों का जवाब तथ्यों और सबूतों के साथ देना होगा. पुलिस कह रही है. दो और नाम सामने आए हैं. एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज ने यह भी बताया है कि प्रारंभिक जांच में गिरफ्तार आरोपियों के अलावा दो अन्य युवकों की भूमिका सामने आई है. यानी कहानी अभी दो आरोपियों पर खत्म नहीं हुई है.
लेकिन सवाल है
• क्या वे दो लोग ही इस पूरी घटना की अगली कड़ी हैं ?
• क्या उनके पास अपहरण में इस्तेमाल वाहनों की जानकारी है ?
• क्या वे बता पाएंगे कि राहुल और तपन को सरना उमूल से रपचा तक कौन ले गया ?
• और क्या पूछताछ के बाद उन लोगों तक पुलिस पहुंचेगी, जिनके नाम अभी सामने नहीं आए हैं ?
परिजनों को सिर्फ शव नहीं, इंसाफ चाहिए
राहुल और तपन के परिवारों के लिए यह मामला अब किसी प्रेस नोट या पुलिस केस नंबर का हिस्सा नहीं है. उन्होंने अपने बेटे खोए हैं. वे यह जानना चाहते हैं कि उनके बेटों को
• किसने उठाया ?
• किसने पीटा ?
• किसकी मौजूदगी में पीटा गया ?
• मौत कैसे हुई ?
• शवों को रपचा तक कौन- कौन लेकर गया ?
• और इस पूरी घटना में कितने लोग शामिल थे ?
अधूरा खुलासा उनके लिए इंसाफ नहीं है. इसीलिए शव मिलने और आरोपियों के जेल जाने के बाद भी परिजन सवालों के जवाब के लिए थाने की चौखट पर बैठे नजर आए.
दो परिवारों के सामने अब सिर्फ एक मांग है
जिसने किया है, उसे सजा मिले. जिसने साथ दिया है, वह भी बचे नहीं. और जिसने पूरी घटना देखी, वह सच सामने लाए. क्योंकि इस मामले में पुलिस ने दो शव बरामद कर लिए हैं.
• दो आरोपियों को जेल भेज दिया है.
• मारपीट की जगह की पुष्टि भी कर दी है.
• लेकिन बोलेरो और स्विफ्ट अभी कहां हैं ?
• सात- आठ युवक कौन थे ?
• सरना उमूल में क्या हुआ था ?
• राहुल और तपन को रपचा तक कौन ले गया ?
और सबसे बड़ा सवाल. क्या पुलिस इस कहानी के हर किरदार तक पहुंचेगी, या दो आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ ही केस की फाइल बंद मान ली जाएगी ? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि राहुल और तपन को सिर्फ न्याय मिला, या फिर पूरा न्याय मिला.
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

