चक्रधरपुर: धरती पर जीवन का आधार जल आज गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है. पीने योग्य पानी तेजी से घट रहा है, जबकि इंसान अपनी लापरवाही से इस अमूल्य संसाधन को लगातार बर्बाद कर रहा है.

आदिवासी युवा मित्र मंडल चक्रधरपुर के सचिव रबिन्द्र गिलुवा ने कहा कि जल का महत्व जितनी जल्दी समझ लिया जाए, उतना ही मानव जीवन के लिए बेहतर होगा. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संरक्षण केवल विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है.
उन्होंने बताया कि पृथ्वी पर लगभग 70 प्रतिशत जल मौजूद है, लेकिन इसमें से केवल 1 प्रतिशत ही मानव उपयोग के योग्य है. बाकी जल समुद्र के खारे पानी और बर्फ के रूप में है. ऐसे में उपलब्ध मीठे पानी की हर बूंद बेहद कीमती है. मानव शरीर में भी जल की महत्वपूर्ण भूमिका है. मस्तिष्क में लगभग 85 प्रतिशत, रक्त में 79 प्रतिशत और फेफड़ों में करीब 80 प्रतिशत जल मौजूद होता है. ऐसे में जल की अनदेखी करना सीधे जीवन को खतरे में डालना है.
तेजी से बढ़ती जनसंख्या और अंधाधुंध दोहन के कारण जल संसाधनों पर दबाव बढ़ता जा रहा है. नदियों, तालाबों और भूजल का अत्यधिक उपयोग और प्रदूषण जल संकट को और गहरा कर रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह संकट और भयावह रूप ले सकता है. घरेलू स्तर पर भी पानी की बर्बादी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है. नहाने, कपड़े धोने, बर्तन साफ करने और वाहनों की धुलाई में अनावश्यक पानी खर्च किया जा रहा है. छोटी- छोटी आदतों में बदलाव कर जल संरक्षण में बड़ा योगदान दिया जा सकता है.
झारखंड की स्थिति भी चिंताजनक है, जहां केवल करीब 12 प्रतिशत लोगों को ही नल के माध्यम से जल की आपूर्ति हो पाती है. ऐसे में जल संरक्षण और जागरूकता बेहद जरूरी हो गई है. जल संकट का असर केवल मानव जीवन पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण, वनस्पति और वन्य जीवों पर भी पड़ता है. जल स्रोतों की सुरक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है.
यह स्पष्ट है कि “जल है तो कल है” केवल एक नारा नहीं, बल्कि सच्चाई है. यदि अभी भी नहीं संभले, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.

