रांची: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन के भीतर सियासी गर्मी बढ़ गई है. कांग्रेस द्वारा बिना औपचारिक सहमति के उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने खुलकर नाराजगी जाहिर कर दी है. अब मामला सिर्फ सीट बंटवारे का नहीं, बल्कि गठबंधन में सम्मान और वर्चस्व की लड़ाई का रूप लेता दिख रहा है.


JMM के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने साफ शब्दों में कहा कि राज्यसभा चुनाव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में लड़ा जाएगा और गठबंधन दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेगा. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि पार्टी कार्यकर्ताओं की भावना है कि दोनों सीटों पर JMM का दावा बनता है.
सुप्रियो भट्टाचार्य ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गठबंधन आपसी सहमति और सम्मान से चलता है. अगर कांग्रेस अपनी बात रखती तो उस पर चर्चा होती, लेकिन बिना सहमति उम्मीदवार घोषित करना सहयोगी दल की भावनाओं को आहत करने वाला कदम है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस भी सपने देख रही है और JMM ने हमेशा एकतरफा प्यार निभाया है.
इधर कांग्रेस की इस रणनीति ने महागठबंधन के भीतर दरार की चर्चाओं को हवा दे दी है. राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या राज्यसभा चुनाव से पहले गठबंधन में सब कुछ ठीक है या अंदर ही अंदर नेतृत्व और हिस्सेदारी को लेकर संघर्ष चल रहा है.
उधर भाजपा ने भी मौके पर चौका लगाने की तैयारी शुरू कर दी है. भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि महागठबंधन के दल आपस में ही उलझे हुए हैं और उनकी एकजुटता पर सवाल खड़े हो रहे हैं. भाजपा ने संकेत दिया है कि वह भी अपना उम्मीदवार मैदान में उतारेगी और पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और JMM के बीच बढ़ी यह तल्खी सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है या राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन की एकजुटता को वास्तविक चुनौती मिलने वाली है. फिलहाल झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव ने नया मसाला और नया सस्पेंस पैदा कर दिया है.

