
सरायकेला: झारखंड का परिवहन विभाग इन दिनों गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझता नजर आ रहा है. राज्य के पांच प्रमुख जिलों सरायकेला- खरसावां, रांची, कोडरमा, गढ़वा और साहेबगंज में जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) का पद लंबे समय से खाली पड़ा है. इतना ही नहीं, विभाग के अपर सचिव का महत्वपूर्ण पद भी रिक्त है. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना नेतृत्व के परिवहन विभाग का संचालन कैसे हो रहा है.


सरकार भले ही ऑनलाइन सेवाओं और सुशासन के दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. पांच जिलों में डीटीओ नहीं होने से ड्राइविंग लाइसेंस, लर्निंग लाइसेंस, वाहन निबंधन, परमिट, वाहन हस्तांतरण और अन्य प्रशासनिक कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. प्रतिदिन सैकड़ों लोग परिवहन कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी के अभाव में उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है.
सबसे चिंताजनक स्थिति सरायकेला- खरसावां की बताई जा रही है. यहां कुछ समय पहले प्रभार देकर व्यवस्था संभालने की कोशिश की गई, लेकिन संबंधित अधिकारी के पास आवश्यक डिजिटल सिग्नेचर और पूर्ण प्रशासनिक अधिकार नहीं होने से व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी. इसके बाद उनका भी तबादला हो गया और विभाग फिर से नेतृत्वविहीन हो गया.
विभाग के अपर सचिव का पद भी लंबे समय से खाली होने के कारण नीतिगत फैसलों और प्रशासनिक कार्यों की रफ्तार प्रभावित होती दिख रही है. ऐसे में जिलों में अधिकारियों की नियुक्ति और लंबित मामलों के समाधान पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब परिवहन विभाग राज्य के राजस्व संग्रह और सड़क परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, तो फिर इतने अहम पद आखिर महीनों तक खाली क्यों पड़े हैं ? क्या सरकार को आम जनता की परेशानियों की चिंता नहीं है ? क्या विभाग भगवान भरोसे चलाया जा रहा है ?
अब लोगों की मांग है कि पांचों जिलों में तत्काल नियमित जिला परिवहन पदाधिकारियों की नियुक्ति की जाए और विभाग के अपर सचिव के रिक्त पद को भी जल्द भरा जाए. क्योंकि यदि यही स्थिति बनी रही तो जनता की परेशानी के साथ-साथ विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठते रहेंगे.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह


