जामताड़ा:


स्थानीय डीएन हाई स्कूल में शुक्रवार को पारंपरिक तरीके से रक्षाबंधन पर्व मनाया गया. इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों के बीच राखी बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया. विद्यार्थियों ने आकर्षक राखियां बनाकर अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया.
प्रतियोगिता में राजीव हेमब्रम की राखी को प्रथम, प्रेम दत्ता की कृति को द्वितीय तथा लिपिक कुमारी की रचना को तृतीय स्थान मिला. विद्यालय की ओर से तीनों विजेता प्रतिभागियों को नकद राशि देकर पुरस्कृत किया गया. वहीं, प्रार्थना सभा में कक्षा सात और कक्षा दस की छात्राओं ने राखी से जुड़े गीत प्रस्तुत कर माहौल को उत्सवमय बना दिया. इसके बाद रक्षाबंधन पर्व से संबंधित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गयी, जिसमें सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया गया.
कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए विद्यालय के निदेशक प्रदीप भैया ने रक्षाबंधन की ऐतिहासिक और पौराणिक परंपराओं की जानकारी दी. उन्होंने भविष्य पुराण, विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षासूत्र बांधने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है.
उन्होंने माता लक्ष्मी द्वारा राजा बलि तथा इंद्राणी द्वारा इंद्र को राखी बांधने के प्रसंगों का उल्लेख किया. भविष्य पुराण के उत्तर पर्व में श्रीकृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को दिए गये संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा का भी वर्णन मिलता है.
प्रदीप भैया ने इतिहास के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए मेवाड़ की महारानी कर्णावती द्वारा मुगल शासक हुमायूं को राखी भेजे जाने और इसके प्रत्युत्तर में हुमायूं द्वारा उनकी सहायता किये जाने की घटना भी बतायी. उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में भी बच्चे देश की सीमा पर तैनात जवानों को राखी भेजकर भाईचारे और रक्षा के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं.
उन्होंने विद्यार्थियों से रक्षाबंधन की भावना को व्यापक बनाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने आसपास के पेड़ों को भी रक्षा सूत्र बांधना चाहिए और जलस्रोतों की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए. पर्यावरण संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी समझने के साथ-साथ भविष्य का निर्माण करने वाले शिक्षकों के सम्मान और गरिमा की रक्षा करना भी विद्यार्थियों की जवाबदेही है.
कार्यक्रम का समापन संबोधन जितेन कुमार पाल ने किया. आयोजन को सफल बनाने में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सराहनीय योगदान रहा.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

