जामताड़ा: सरकार के खजाने में हर साल करोड़ों रुपये का राजस्व जमा कराने वाला जामताड़ा जिला उत्पाद कार्यालय खुद मानवबल की कमी से जूझ रहा है. विभाग में उत्पाद सिपाही के 15 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में एक भी उत्पाद सिपाही कार्यरत नहीं है. करीब एक दशक से चली आ रही इस कमी का सीधा असर अवैध शराब के खिलाफ होने वाली कार्रवाई पर पड़ रहा है.


स्थिति सिर्फ उत्पाद सिपाहियों तक सीमित नहीं है. उत्पाद निरीक्षक, सहायक अवर निरीक्षक उत्पाद और अन्य स्वीकृत पदों पर भी पर्याप्त कर्मियों की कमी बनी हुई है. फिलहाल जिला प्रशासन की ओर से एक हवलदार समेत चार जवान उपलब्ध कराए गए हैं. इसी सीमित बल के सहारे विभाग को छापेमारी और कार्रवाई करनी पड़ रही है. बड़ी कार्रवाई की स्थिति में स्थानीय थाना की पुलिस का सहयोग लेना पड़ता है.
लगातार तीसरे साल लक्ष्य से अधिक राजस्व
दिलचस्प बात यह है कि कर्मचारियों और जवानों की कमी के बावजूद जामताड़ा उत्पाद विभाग राजस्व संग्रह में लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहा है. पिछले तीन वित्तीय वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि विभाग ने हर वर्ष निर्धारित लक्ष्य को पार किया है. वित्तीय वर्ष 2023- 24 में 22 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 22 करोड़ 36 लाख 25 हजार रुपये राजस्व प्राप्त हुआ. उपलब्धि 101.65 प्रतिशत रही.
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 25 करोड़ 56 लाख 90 हजार रुपये के लक्ष्य के विरुद्ध 25 करोड़ 87 लाख 33 हजार रुपये राजस्व सरकार के खजाने में जमा कराया गया. उपलब्धि 101.19 प्रतिशत रही. वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में लक्ष्य बढ़कर 37 करोड़ 49 लाख 79 हजार रुपये हो गया. विभाग ने इसके मुकाबले 38 करोड़ 14 लाख रुपये राजस्व संग्रह किया. इस वर्ष उपलब्धि 101.71 प्रतिशत रही. यानी लगातार तीन वित्तीय वर्षों में विभाग ने अपने निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व सरकार को दिया.
जुलाई तक 15.50 करोड़ रुपये का राजस्व
वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026- 27 में भी विभाग की कार्रवाई और राजस्व संग्रह जारी है. जुलाई तक उत्पाद विभाग ने 15 करोड़ 50 लाख 39 हजार रुपये राजस्व सरकार के खजाने में जमा कराया है.
एक तरफ विभाग सीमित संसाधनों के बावजूद राजस्व संग्रह का लक्ष्य लगातार पार कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसके स्वीकृत पद खाली पड़े हैं. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिस विभाग से सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिल रहा है, उसे पर्याप्त मानवबल उपलब्ध कराने में आखिर देरी क्यों हो रही है.
चार जवानों के भरोसे अवैध शराब के खिलाफ अभियान
उत्पाद विभाग का प्रमुख दायित्व अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करना है. इसके लिए प्रशिक्षित और पर्याप्त संख्या में बल की आवश्यकता होती है. लेकिन जामताड़ा में 15 स्वीकृत उत्पाद सिपाही पदों पर शून्य नियुक्ति है. वर्तमान में जिला प्रशासन से मिले एक हवलदार समेत चार जवानों के सहयोग से अभियान चलाया जा रहा है. किसी बड़े अभियान या एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की जरूरत पड़ने पर विभाग को स्थानीय थानों की पुलिस पर निर्भर रहना पड़ता है.
इस व्यवस्था में एक चुनौती यह भी है कि स्थानीय थाना पुलिस पहले से ही अपने क्षेत्र की कानून-व्यवस्था और अन्य जिम्मेदारियों में व्यस्त रहती है. ऐसे में उत्पाद विभाग को नियमित और स्वतंत्र बल उपलब्ध नहीं होने से कार्रवाई की क्षमता प्रभावित हो सकती है.
सरकार को लगातार भेजे जा रहे पत्र
उत्पाद अधीक्षक कुंदन कुमार कौशल ने बताया कि विभाग की ओर से सरकार को लगातार पत्र भेजकर उत्पाद निरीक्षक, अवर निरीक्षक, उत्पाद सिपाही और लिपिक समेत रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग की जा रही है. उन्होंने कहा कि अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ विभाग की ओर से चरणबद्ध कार्रवाई लगातार जारी है.
राजस्व देने वाले विभाग को ही मानवबल का इंतजार
जामताड़ा उत्पाद विभाग के आंकड़े एक विरोधाभासी तस्वीर सामने रखते हैं. एक ओर सीमित संसाधनों के बावजूद विभाग लगातार लक्ष्य से अधिक राजस्व जुटा रहा है, वहीं दूसरी ओर 15 स्वीकृत उत्पाद सिपाही पदों पर एक भी नियुक्ति नहीं है.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि यदि विभाग को पर्याप्त अधिकारी, कर्मचारी और जवान उपलब्ध करा दिए जाएं, तो अवैध शराब के खिलाफ अभियान कितना अधिक प्रभावी हो सकता है. राजस्व में विभाग आगे है, लेकिन संसाधनों की दौड़ में पीछे क्यों ? यह सवाल अब सिर्फ विभागीय व्यवस्था का नहीं, बल्कि सरकार की प्राथमिकता और प्रशासनिक क्षमता का भी है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

