जामताड़ा: संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और मंगल कामना को लेकर महिलाओं ने श्रद्धा एवं निष्ठा के साथ जीवित्पुत्रिका (जितिया) व्रत रखा. जामताड़ा एसबीआई मुख्य शाखा के समीप स्थित प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान एवं व्रत कथा का आयोजन हुआ. बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर संतान की सुख-समृद्धि और दीर्घायु की कामना की.


मंदिर परिसर में पंडित संजय पांडेय ने श्रद्धालुओं को जीवित्पुत्रिका व्रत की पौराणिक कथा सुनाई. उन्होंने बताया कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला यह व्रत माताओं की अटूट श्रद्धा और संतान के प्रति समर्पण का प्रतीक माना जाता है. व्रत के दौरान महिलाएं विधि-विधान से पूजा कर अपने और अपनी संतान के गले में जितिया धारण करती हैं.
जीमूतवाहन के त्याग की कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
कथा के दौरान पंडित संजय पांडेय ने राजा जीमूतवाहन की कथा सुनाई. उन्होंने बताया कि गंधर्वराज जीमूतवाहन अत्यंत दयालु, उदार और परोपकारी थे. एक बार वन में उन्हें एक नागमाता विलाप करती मिलीं. उस दिन उनके पुत्र शंखचूड़ को गरुड़ के आहार के रूप में प्रस्तुत किया जाना था. नागमाता की पीड़ा देखकर जीमूतवाहन ने शंखचूड़ के प्राण बचाने का
संकल्प लिया और स्वयं लाल वस्त्र धारण कर वध-शिला पर लेट गए. गरुड़ जब उन्हें लेकर आकाश की ओर बढ़े, तब भी जीमूतवाहन के चेहरे पर भय नहीं था. उनकी त्याग भावना और साहस से प्रभावित होकर गरुड़ ने नागों को अपना आहार नहीं बनाने का संकल्प लिया. पंडित संजय पांडेय ने बताया कि जीमूतवाहन के इसी त्याग और परोपकार की स्मृति जीवित्पुत्रिका व्रत की धार्मिक परंपरा से जुड़ी मानी जाती है.
चील-सियारिन की कथा से व्रत की निष्ठा का संदेश
उन्होंने चील और सियारिन की कथा भी सुनाई. कथा के अनुसार दोनों ने महिलाओं को जितिया व्रत करते देखकर स्वयं भी व्रत रखने का संकल्प लिया था. चील ने पूरी निष्ठा और नियम के साथ निर्जला उपवास किया, जबकि भूख से व्याकुल सियारिन से व्रत का नियम भंग हो गया.
कथा में बताया गया कि व्रत के प्रभाव से चील की संतानों को दीर्घायु और सुख प्राप्त हुआ, जबकि सियारिन की संतानों को इसका विपरीत परिणाम भुगतना पड़ा.पंडित संजय पांडेय ने कहा कि यह कथा व्रत के दौरान संयम, श्रद्धा, नियम और निष्ठा के महत्व का संदेश देती है.
कथा श्रवण के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा रहा. महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक कथा सुनी और पूजा- अर्चना कर अपनी संतानों के स्वस्थ, सुखी और दीर्घायु जीवन की कामना की.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

