जामताड़ा: बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रखने और साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से बुधवार को उत्क्रमित मध्य विद्यालय, दुलाडीह में “सुरक्षित क्लिक, सुरक्षित बचपन” अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जामताड़ा के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों को इंटरनेट और सोशल मीडिया के सुरक्षित इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों से बचाव के तरीके बताए गए.


कार्यक्रम में सब-इंस्पेक्टर अनिल अभिषेक एवं सब-इंस्पेक्टर प्रशांत कुमार ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन गेमिंग के दौरान सावधानी बरतने, अनजान लोगों से इंटरनेट पर संपर्क नहीं करने तथा अपनी निजी तस्वीरें और व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी. उन्होंने ऑनलाइन उत्पीड़न, साइबर ब्लैकमेलिंग और अन्य साइबर अपराधों के संभावित खतरों की जानकारी देते हुए बच्चों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया.
साइबर अपराध होने पर तुरंत करें शिकायत
अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि साइबर अपराध का शिकार होने पर घबराने के बजाय समय पर शिकायत दर्ज कराना जरूरी है. इसके लिए साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in की जानकारी दी गई. साथ ही बच्चों को किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधि की जानकारी अपने अभिभावकों या शिक्षकों को देने की सलाह दी गई.
इस अवसर पर पैनल अधिवक्ता पूजा हांसदा एवं एलएडीसी अरिजीत बोस ने बच्चों के अधिकारों और साइबर अपराध की स्थिति में उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानकारी दी. विद्यार्थियों को निःशुल्क विधिक सहायता के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की हेल्पलाइन 15100 तथा बच्चों की सहायता एवं संरक्षण के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के बारे में भी बताया गया.
सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार अपनाने पर जोर
कार्यक्रम में प्रभारी प्रधानाध्यापिका आरती सिंह, सहायक आचार्या रोज नीलम तिग्गा, सहायक शिक्षक श्रवण कुमार झा तथा पीएलवी आर्यन अंसारी, अमित कुमार मिश्रा, आनंद महतो, शिवनाथ, मधु कुमारी, शबाना यास्मीन, मेघा गुप्ता और उज्ज्वल कुमार घोष सहित विद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित थे. कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को डिजिटल माध्यमों का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने, साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने और किसी भी परेशानी की स्थिति में सही समय पर सहायता लेने के लिए प्रेरित करना था.
रिपोर्ट: मनीष बरनवाल

