
जमशेदपुर/आदित्यपुर: डबल डाउन बार के बाहर हुई चाकूबाजी की घटना अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं रह गई है. करणी सेना युवा मोर्चा के सरायकेला-खरसावां जिला अध्यक्ष हिमांशु सिंह की मौत के बाद यह मामला पुलिस की कार्यशैली, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया. लगातार बढ़ते जनदबाव, राजनीतिक प्रतिक्रिया और सामाजिक संगठनों के विरोध के बीच आखिरकार झारखंड सरकार को बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करनी पड़ी.


घटना बीते शनिवार देर रात बिष्टुपुर स्थित डबल डाउन बार के बाहर हुई, जहां दो पक्षों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया. इस दौरान हिमांशु सिंह और प्रत्युष सिंह पर धारदार हथियार से हमला किया गया. सोशल मीडिया पर वायरल सीसीटीवी फुटेज में पुलिस पीसीआर वाहन के समीप पूरी घटना दिखाई देने के बाद पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे. आरोप लगा कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद हमलावर युवकों को पीसीआर वाहन से बाहर निकालकर हमला करने में सफल रहे.
घटना में गंभीर रूप से घायल हिमांशु सिंह ने सोमवार को टाटा मेन अस्पताल (TMH) में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जबकि प्रत्युष सिंह का इलाज कोलकाता में चल रहा है. हिमांशु की मौत के बाद आदित्यपुर, जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश फैल गया. समर्थकों और स्थानीय लोगों ने रीगल गोलचक्कर जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया तथा दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की.
मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने बार संचालक सह भाजपा नेता नीरज सिंह समेत 11 लोगों को नामजद आरोपी बनाया. कई आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई और डबल डाउन बार को सील कर दिया गया. इसके साथ ही बिष्टुपुर थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया.
जोनल एडीजी सह एडीजी सीआईडी मनोज कौशिक स्वयं जमशेदपुर पहुंचे. उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण किया, पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की और निष्पक्ष व त्वरित जांच के निर्देश दिए. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, भाजपा नेता भानु प्रताप शाही, विधायक पूर्णिमा साहू, विश्व हिंदू परिषद सहित कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
इस बीच करणी सेना और परिजनों ने सभी नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी, मुख्य आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा, सरकारी नौकरी और मुआवजा मिलने तक अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया. मंगलवार देर रात पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक पियूष पांडे स्वयं आदित्यपुर पहुंचकर परिजनों से मिले और पोस्टमार्टम कराने का अनुरोध किया, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही.
लगातार बढ़ते जनदबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक पियूष पांडे और उनकी पत्नी सह सरायकेला- खरसावां की पुलिस अधीक्षक निधि द्विवेदी को विधि- व्यवस्था बनाए रखने तथा अपराध नियंत्रण में लापरवाही के आरोप में तत्काल प्रभाव से हटाकर पुलिस मुख्यालय से संबद्ध कर दिया. साथ ही चाईबासा के आयुक्त, रांची के एडीजी और जमशेदपुर के डीआईजी को क्षेत्र में कैंप कर कानून- व्यवस्था की निगरानी के निर्देश दिए गए.
मुख्यमंत्री की इस कार्रवाई का विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने स्वागत किया. जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने इसे सरकार का सकारात्मक कदम बताया. साथ ही उन्होंने प्रशासन से बढ़ते अपराध पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में सार्थक कदम उठाने की अपील की. इधर मंगलवार देर रात प्रशासन ने हिमांशु के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों से शव लेने का अनुरोध किया जिसके बाद मामले में नया मोड़ आ गया. परिजनों ने कार्रवाई होने तक शव लेने से इंकार कर दिया. इधर दोनों जिलों के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी अलर्ट मोड पर हैं. पूरे शहर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. प्रशासन बार-बार परिजनों से शव अंतिम संस्कार कराने की अपील कर रहे हैं साथ ही हर संभावित स्थिति से निपटने की तैयारी में भी जुटी है. उनका कहना है कि अब पुलिस- प्रशासन पर भरोसा रखते हुए परिजनों को अंतिम संस्कार की दिशा में पहल करनी चाहिए, ताकि दिवंगत आत्मा को सम्मानपूर्वक विदाई मिल सके.
अब वक्त संयम और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसे का है
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा दोनों जिलों के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को हटाने जैसी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई यह संकेत देती है कि सरकार ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है. ऐसे में अब आवश्यक है कि पुलिस और प्रशासन परिजनों की सभी न्यायोचित मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का लिखित आश्वासन दें, शेष आरोपियों को शीघ्र गिरफ्तार करें और स्पीडी ट्रायल के माध्यम से दोषियों को कठोर सजा दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं.
दूसरी ओर, समाज के प्रबुद्धजनों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है कि वे शोकाकुल परिवार का संबल बनें और संवाद के माध्यम से समाधान की दिशा में पहल करें. यह भी सुनिश्चित किया जाए कि न्याय की लड़ाई लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़े.
हिमांशु सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि तभी होगी जब दोषियों को कानून के अनुसार दंड मिले और शहर का सामाजिक सौहार्द भी बना रहे. जमशेदपुर और आदित्यपुर हमेशा अपनी औद्योगिक पहचान, सामाजिक सद्भाव और भाईचारे के लिए जाने जाते रहे हैं. ऐसे में सभी पक्षों को संयम बरतते हुए किसी भी अफवाह या उकसावे से बचना चाहिए, ताकि शहर में अमन-चैन और कानून-व्यवस्था कायम रहे.
अब पूरे प्रदेश की निगाहें पुलिस- प्रशासन की अगली कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं. उम्मीद की जानी चाहिए कि प्रशासन त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएगा तथा शहर में सामान्य स्थिति जल्द बहाल होगी.
Edited By Sarita






