सरायकेला: खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के संभावित प्रभावों को लेकर रविवार को सर्किट हाउस में झामुमो की बैठक आयोजित की गई. जिला अध्यक्ष डॉ. शुभेंदु महतो की अध्यक्षता में हुई बैठक में सिंहभूम सांसद जोबा माझी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं. ईचागढ़ विधायक सविता महतो और खरसावां विधायक दशरथ गागराई विशिष्ट अतिथि रहे.



बैठक में प्रस्तावित विधेयक से झारखंड की आर्थिक स्वायत्तता, खनिज राजस्व और विकास योजनाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई. जारी विधेयक के आधार पर दावा किया गया कि राज्य को हर वर्ष करीब 11 हजार से 15 हजार करोड़ रुपये तक के संभावित राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.
वक्ताओं ने कहा कि खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इसमें कमी आने का असर गरीबों, किसानों, महिलाओं, युवाओं और ग्रामीण आबादी के लिए संचालित योजनाओं पर पड़ सकता है. बैठक में मंईयां सम्मान, अबुआ आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसान सहायता और ग्रामीण विकास जैसी योजनाओं पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई.
नेताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां के प्राकृतिक संसाधनों का लाभ राज्य की जनता को मिलना चाहिए. वक्ताओं ने राज्य की वित्तीय स्वायत्तता और संसाधनों पर अधिकार को लेकर केंद्र सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाए.
बैठक में यह भी कहा गया कि खनिज राजस्व में कमी का असर निवेश, रोजगार, स्थानीय उद्योग, खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और पर्यावरण संरक्षण पर पड़ सकता है. उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विधेयक के संभावित प्रभावों को लेकर जनजागरूकता अभियान चलाने तथा झारखंड के अधिकार, अस्मिता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए आवाज बुलंद करने का संकल्प लिया.
बैठक में सरायकेला नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी, केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य गणेश चौधरी, काबलू महतो, विशु हेंब्रम, गणेश महाली, डब्बा सोरेन, कृष्ण बास्के, दुर्गा लाल मुर्मू, राम सिंह हेंब्रम, प्रोफेसर काली पद सोरेन, लालबाबू सरदार, शकुंतला महाली, सन्नी सिंह सहित कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे.
प्रमोद सिंह (संपादक)

