धनबाद: झारखंड के चर्चित वासेपुर हत्याकांड के दोषी फहीम खान की रिहाई का रास्ता अब लगभग साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार की अपील खारिज करते हुए झारखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें फहीम खान को रिहा करने का निर्देश दिया गया था. शीर्ष अदालत के फैसले के बाद अब आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने पर उनकी रिहाई संभव मानी जा रही है.



फहीम खान को वर्ष 1989 के चर्चित सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था. सत्र न्यायालय ने 15 जून 1991 को उन्हें दोषसिद्ध किया था. बाद में झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2009 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई, जिसे वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था.
लंबे समय तक जेल में रहने, बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी आधार पर फहीम खान की ओर से रिहाई की मांग की गई थी. इस पर झारखंड हाईकोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को अपने फैसले में कहा कि सरकार ने रिहाई पर विचार करते समय 2007 की संशोधित रिमिशन नीति लागू की, जबकि उनके मामले में 1991 के समय प्रभावी 1984 की रिमिशन नीति लागू होनी चाहिए थी. इसी आधार पर हाईकोर्ट ने सरकार को छह सप्ताह के भीतर रिहाई की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था.
हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी और हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया.
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला केवल फहीम खान के मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि उन मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण है, जिनमें सजा के समय लागू रिमिशन नीति और बाद में बनी संशोधित नीतियों को लेकर विवाद रहा है.
फहीम खान का नाम फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ से जुड़ी चर्चाओं के कारण भी लंबे समय से सुर्खियों में रहा है. हालांकि फिल्म और वास्तविक घटनाओं के बीच कई रचनात्मक अंतर हैं.
अब जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी किए जाने के बाद फहीम खान की रिहाई पर अंतिम निर्णय अमल में आएगा. वहीं, राज्य सरकार ने उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार करने के संकेत दिए हैं.





