Gamharia Congress Protest गम्हरिया: सत्ता कांग्रेस का, धरना भी कांग्रेस की… फिर “चोर” कहें या “भ्रष्टाचारी” कांग्रेसियों की मर्जी, क्या ऐसे कांग्रेस करेगी सत्ता में वापसी ?
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गम्हरिया: झारखंड में कांग्रेस सत्ता का हिस्सा है. राहुल गांधी देशभर में कांग्रेस की खोई जमीन वापस लाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं. संविधान बचाने से लेकर संगठन मजबूत करने तक का संदेश दे रहे हैं. लेकिन लगता है कि झारखंड के कुछ कांग्रेस नेताओं ने शायद यह तय कर लिया है कि पार्टी को जितना विपक्ष नुकसान नहीं पहुंचा सकता, उससे कहीं ज्यादा नुकसान वे खुद पहुंचा देंगे.
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ताजा मामला सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड का है. यहां कांग्रेस के गम्हरिया प्रखंड और आदित्यपुर नगर कमेटी के नेताओं ने कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ अंचल कार्यालय में धरना- प्रदर्शन किया. विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन सवाल यह है कि विरोध किसके खिलाफ था ? उस सरकार के अधिकारियों के खिलाफ, जिसकी सरकार में कांग्रेस खुद साझेदार है.
हैरानी की बात यह भी है कि कांग्रेस नेताओं ने सरकारी अधिकारियों को खुलेआम “चोर” और “भ्रष्टाचारी” जैसे शब्दों से संबोधित किया. यदि किसी अधिकारी पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो जांच कराना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन बिना जांच किसी को अपराधी घोषित कर देना क्या लोकतांत्रिक राजनीति की भाषा है ?
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि सत्ता में बैठी पार्टी खुद अपनी सरकार के खिलाफ धरने पर बैठी दिखाई दी. यदि अंचल कार्यालय में भ्रष्टाचार है, तो जनता यह भी पूछेगी कि इतने वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी थी ? क्या हर समस्या के लिए केवल अधिकारी ही जिम्मेदार हैं ? फिर मंत्री, विधायक और सत्तारूढ़ दल की भूमिका क्या है ?
बताया जा रहा है कि इस प्रदर्शन के लिए प्रशासनिक अनुमति भी नहीं ली गई. यदि यह सही है, तो सवाल और गंभीर हो जाता है. क्या कानून केवल आम नागरिकों और विपक्षी दलों के लिए है? यदि यही काम कोई दूसरा संगठन करता, तो क्या प्रशासन का रवैया यही रहता ?
लोकतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन सत्ता में रहकर अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना ऐसा है जैसे कोई कप्तान खुद अपनी टीम के खिलाफ मैदान में उतर जाए और हार का ठीकरा केवल अंपायर पर फोड़ दे.
कांग्रेस को यह तय करना होगा कि वह सरकार चला रही है या विपक्ष की भूमिका निभा रही है. क्योंकि जनता अब नारों से ज्यादा जवाबदेही मांग रही है. सत्ता केवल कुर्सी का नाम नहीं, जिम्मेदारी का भी नाम है. यदि व्यवस्था भ्रष्ट है तो सवाल अधिकारियों से पहले सत्ता से पूछा जाएगा. और सत्ता में कांग्रेस भी बराबर की भागीदार है.