चाईबासा/ Jayant Pramanik जिले के सोनुआ प्रखंड कार्यालय सभागार में सोमवार को आंगनबाड़ी सेविकाओं के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. एस्पायर संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस प्रशिक्षण का मुख्य विषय ‘नन्हे कदम’ के माध्यम से प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा को मजबूत करना रहा.

प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रखंड की आंगनवाड़ी सेविकाओं को 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई. विशेषज्ञों ने प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि जीवन के शुरुआती वर्षों में ही शारीरिक, संज्ञानात्मक, भाषाई, सामाजिक और भावनात्मक विकास की नींव रखी जाती है.
प्रशिक्षकों ने ECCE और ECD के अंतर को समझाते हुए बताया कि यह बच्चों के संपूर्ण विकास की एक व्यापक प्रक्रिया है. इसमें पोषण, सुरक्षा और स्वास्थ्य के साथ-साथ प्री-स्कूल शिक्षा को भी शामिल किया जाता है, ताकि बच्चे मानसिक और सामाजिक रूप से प्राथमिक शिक्षा के लिए तैयार हो सकें.
कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रखंड के एलईपी समन्वयक गोपीनाथ बोबोंगा, जगन्नाथ सोरेन और देवानंद गोप ने प्रशिक्षक की भूमिका निभाई. इस दौरान विभिन्न आंगनवाड़ी केंद्रों की सेविकाएं और सहायक शिक्षक बड़ी संख्या में मौजूद रहे.
प्रशिक्षकों ने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण के बाद आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की देखभाल और शिक्षा की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा.

