गम्हरिया: झारखंड की पारंपरिक लोककला और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से आदिवासी कुड़मी समाज की ओर से एक दिवसीय मांदर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. गम्हरिया प्रखंड के नारायणपुर पंचायत अंतर्गत आसनबनी (कालाडूंगरी) गांव के सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में युवाओं को पारंपरिक वाद्य यंत्र मांदर बजाने का प्रशिक्षण दिया गया.


आगामी वंदना परब को ध्यान में रखते हुए आयोजित प्रशिक्षण का उद्देश्य युवा पीढ़ी को पारंपरिक वाद्य कला से परिचित कराने के साथ अपनी भाषा, रीति- रिवाज, संस्कृति और सामाजिक पहचान से जोड़े रखना है.
आयोजकों ने कहा कि मांदर केवल एक वाद्य यंत्र नहीं, बल्कि पारंपरिक पर्व- त्योहार और सांस्कृतिक आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा है. आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बीच नई पीढ़ी को पारंपरिक कला का व्यावहारिक प्रशिक्षण देना सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है.
आदिवासी कुड़मी समाज ने कहा कि इस पहल के माध्यम से युवाओं को अपनी संस्कृति पर गर्व करने और मांदर वादन जैसी पारंपरिक कलाओं को सीखकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
रिपोर्ट: प्रकाश महतो

