आदित्यपुर: निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली और सरकारी नियंत्रण को लेकर बहस तेज हो गई है. इस बीच आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष पुरेन्द्र नारायण सिंह ने बड़ा बयान देते हुए व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं.

उन्होंने कहा कि निजी स्कूलों पर सरकारी गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित कराना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है. सरकार और प्रशासन अपने स्तर पर शिक्षा से जुड़े नियमों को लागू करने का प्रयास करते रहे हैं, लेकिन निजी स्कूलों की एकजुटता के कारण यह पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रहा है.
पुरेन्द्र नारायण सिंह ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार वास्तव में निजी स्कूलों पर नियंत्रण चाहती है, तो सबसे पहले सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होगा, ताकि वे निजी स्कूलों के मुकाबले खड़े हो सकें. उन्होंने एक कदम आगे बढ़ते हुए यह भी सुझाव दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो सरकार को निजी स्कूलों के अधिग्रहण जैसे कठोर फैसले पर भी विचार करना चाहिए, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और समानता लाई जा सके.
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हाल ही में DAV NIT आदित्यपुर के फीस विवाद को लेकर डीसी ने संज्ञान लिया है और शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन से जवाब तलब किया है. इस बयान के बाद शिक्षा व्यवस्था, निजी स्कूलों की भूमिका और सरकारी नियंत्रण को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है.

