आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र में नए प्रशासनिक भवन को लेकर चल रहे सियासी घमासान के बीच स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता सह अधिवक्ता ओम प्रकाश ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ कहा है कि वर्तमान समय में सबसे बड़ी और गंभीर समस्या पेयजल संकट है, न कि भवन निर्माण.

ओम प्रकाश ने प्रेस बयान जारी करते हुए कहा कि भीषण गर्मी के इस दौर में आदित्यपुर की जनता पानी के लिए जूझ रही है. ऐसे में प्राथमिकता बिना किसी देरी के सीतारामपुर वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से 30 एमएलडी जलापूर्ति को तुरंत चालू कराने पर होनी चाहिए. इसके साथ ही सापड़ा में निर्माणाधीन 60 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्य को भी तेज करने की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक भवन निर्माण का मुद्दा पिछले तीन- चार वर्षों से लंबित है, लेकिन आम लोगों के लिए यह प्राथमिक आवश्यकता नहीं है. “एक आम आदमी को नगर निगम कार्यालय साल में एक-दो बार ही जाना पड़ता है, लेकिन पीने का पानी हर दिन चाहिए,” उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि जब तक सीतारामपुर स्थित 30 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट नियमित रूप से संचालित नहीं हो जाता, तब तक प्रशासनिक भवन निर्माण के मुद्दे को प्राथमिकता देना उचित नहीं होगा.
उन्होंने जोर देकर कहा कि नगर निगम और प्रशासन को जनता की बुनियादी जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए. जल संकट का स्थायी समाधान होने के बाद ही अन्य विकास कार्यों पर ध्यान दिया जाना चाहिए. इस बयान के बाद आदित्यपुर में चल रही सियासत को नया मोड़ मिल गया है. आपको बता दें कि ओमप्रकाश सामाजिक संस्थान जन कल्याण मोर्चा और झारखंड लीगल डेवलपमेंट आर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष भी हैं. उन्होंने अपने नेतृत्व में आदित्यपुर के विकास को नई दिशा दी है. आज टाटा- कांड्रा सड़क और नया खरकाई पुल जन कल्याण मोर्चा के आंदोलन की ही देन है. इतना ही नहीं आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति योजना आज धरातल पर उतरने जा रहा है इसमें भी जनकल्याण मोर्चा और जलाडो ने बड़ी जिम्मेदारी निभाई है. ओमप्रकाश का बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब आदित्यपुर की राजनीति मुद्दों से भटककर नगर निगम के प्रशासनिक भवन में उलझ कर रह गई है उधर क्षेत्र की बड़ी आबादी पानी सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए त्राहिमाम कर रही है. अब देखना होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं.

