आदित्यपुर. सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम के नक्कारेपन की वजह से वार्ड-17 में टाटा-कांड्रा सर्विस रोड से जयप्रकाश उद्यान होते हुए लक्ष्य अपार्टमेंट तक बनने वाली पीसीसी सड़क अब तक अधर में लटकी हुई है. इतना ही नहीं, निगम अधिकारियों ने सांसद से अवैध रूप से शिलान्यास कराकर उनकी भारी किरकिरी करा दी.

अब निगम की एक नई चिट्ठी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, जो यह दिखाती है कि निगम के अफसर या तो किसी के इशारे पर काम कर रहे हैं या फिर उन्हें नियम-कानून की समझ नहीं है.
दरअसल, नगर निगम की ओर से प्रशासक के हस्ताक्षर से गम्हरिया अंचल अधिकारी को पत्रांक संख्या 3379, दिनांक 12/09/2025 जारी किया गया है. इस पत्र में सहायक अभियंता सुरेंद्र महतो और कनीय अभियंता राहुल कुमार को जयप्रकाश उद्यान में टाटा-कांड्रा सर्विस रोड से लक्ष्य अपार्टमेंट तक पीसीसी रोड निर्माण के क्रियान्वयन हेतु वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत “आम सभा” के लिए नामित किया गया है. हालांकि पत्र में संबंधित धारा का कोई उल्लेख नहीं किया गया है.
अब सवाल उठ रहा है — “आम सभा क्यों ?” क्या कोई रैली या AGM बुलानी है ? शहरी क्षेत्र में “वार्ड सभा” और ग्रामीण क्षेत्र में “ग्राम सभा” का प्रावधान होता है, लेकिन “आम सभा” की बात निगम की समझ पर सवाल खड़ा करती है.
ज्ञात हो कि इस सड़क के लिए क्षेत्र की जनता लंबे समय से संघर्ष कर रही है. तत्कालीन पार्षद नीतू शर्मा और स्थानीय लोगों के प्रयास से वन विभाग से सशर्त NOC मिला था, जिसे नगर निगम की पिछली बोर्ड बैठक में पारित किया गया था. वन विभाग ने एक वर्ष की समय-सीमा में निर्माण कार्य पूरा करने की शर्त रखी थी, अन्यथा भूमि वापस लेने का प्रावधान था.
एक साल गुजरने के बाद नगर निगम ने हड़बड़ी में टेंडर निकाला और NOC की अवधि खत्म होने के बाद सांसद जोबा मांझी से शिलान्यास करवा दिया. जैसे ही काम शुरू हुआ, वन विभाग ने एनओसी की शर्तों का हवाला देकर निर्माण रुकवा दिया. इसके बाद मामला ठप हो गया और जनता की उम्मीदें टूट गईं.
मीडिया में मामला उजागर होने के बाद निगम और उपायुक्त ने सक्रियता दिखाई. वार्ड सभा करवा कर पुनः एनओसी के लिए प्रक्रिया शुरू की गई. लेकिन अब निगम की ओर से जारी नया पत्र, जिसमें “आम सभा” बुलाने की बात कही गई है, ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है.
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहरी क्षेत्र में वन अधिनियम के कौन से प्रावधान लागू होते हैं? जहां अवैध रूप से हजारों एकड़ वन भूमि कब्जे में चली गई, वहां जनहित की सड़क योजना पर ऐसी अड़चन क्यों ?
इस मामले में निवर्तमान पार्षद ने छठ के बाद आमरण अनशन की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि “जनता के संघर्ष और मेहनत से मिली NOC को कुछ लोगों ने साजिश के तहत रद्द करवाया. जनता की भावनाओं से खिलवाड़ किया गया.” अब देखना यह दिलचस्प होगा कि नगर निगम की ‘आम सभा’ से क्या निष्कर्ष निकलता है. क्या यह सड़क बनेगी या फिर यह भी एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह जाएगी.

