
सरायकेला: आदित्यपुर- कांड्रा सड़क मरम्मत में कथित वित्तीय अनियमितता के बहुचर्चित मामले में करीब 16 वर्ष बाद न्यायिक प्रक्रिया ने महत्वपूर्ण मोड़ लिया है. वर्ष 2004-05 में लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से हुई सड़क मरम्मत में कथित गड़बड़ी के मामले में बुधवार को सरायकेला व्यवहार न्यायालय में आरोप गठित किया गया.


यह मामला सामाजिक संगठन जन कल्याण मोर्चा, आदित्यपुर के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता ओम प्रकाश द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका संख्या WP (PIL) 5186/2008 के बाद चर्चा में आया था. याचिका में आदित्यपुर-कांड्रा सड़क मरम्मत कार्य में भारी अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था.
मामले की लंबी सुनवाई के बाद झारखंड उच्च न्यायालय के निर्देश पर वर्ष 2009 में पथ निर्माण विभाग के तत्कालीन अधीक्षण अभियंता ताला हांसदा ने आदित्यपुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. प्राथमिकी में पथ निर्माण विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता, संवेदक एवं अन्य संबंधित लोगों को आरोपी बनाया गया था. मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 120बी तथा बिहार प्रिवेंशन ऑफ स्पेसिफाइड करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट, 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था.
बुधवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 की अदालत में पथ निर्माण विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता और तत्कालीन संवेदक सशरीर उपस्थित हुए. अदालत ने दोनों आरोपियों के विरुद्ध आरोप गठित करते हुए मामले की आगे की सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया.
गौरतलब है कि उस समय आदित्यपुर-कांड्रा-सरायकेला मार्ग की स्थिति बेहद खराब हो गई थी. सड़क कई स्थानों पर पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर गड्ढों में तब्दील हो गई थी, जिससे लगातार दुर्घटनाएं हो रही थीं. हालात ऐसे थे कि लोगों को मुख्य सड़क छोड़कर सीतारामपुर डैम और ग्रामीण मार्गों से होकर सरायकेला आना-जाना पड़ता था.
करीब डेढ़ दशक से अधिक समय से लंबित इस मामले में आरोप गठन को न्यायिक प्रक्रिया की महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है. अब सभी की नजरें अदालत की आगामी सुनवाई और अंतिम फैसले पर टिकी हैं.


