आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिले के आदित्यपुर नगर निगम के प्रशासनिक भवन को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच अब सरकारी दस्तावेजों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है. अब तक वार्ड 30 स्थित जागृति मैदान को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आए आधिकारिक पत्र यह स्पष्ट करते हैं कि प्रशासनिक स्तर पर नगर निगम कार्यालय के लिए हथियाडीह की जमीन तय की जा चुकी है.

उपायुक्त कार्यालय द्वारा 12 सितंबर 2025 को नगर विकास एवं आवास विभाग, झारखंड सरकार को भेजे गए पत्र में गम्हरिया अंचल के हथियाडीह मौजा में खाता संख्या 83, प्लॉट संख्या 247, कुल लगभग 1.65 एकड़ जमीन को नगर निगम कार्यालय निर्माण के लिए चिन्हित किया गया. यह जमीन ‘पुरानी परती’ और अनाबाद भूमि बताई गई है, जो पूर्व में बिहार सरकार और वर्तमान में झारखंड सरकार के अधीन है.
इसके बाद 3 नवंबर 2025 को विभागीय स्तर से जारी पत्र में इस भूमि के अंतर्विभागीय नि:शुल्क हस्तांतरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया. यानी प्रशासनिक स्तर पर यह लगभग तय हो चुका है कि नगर निगम का कार्यालय हथियाडीह में ही बनेगा.
गौरतलब है कि इससे पहले जागृति मैदान में नगर निगम भवन निर्माण का प्रस्ताव आया था, जिसका स्थानीय स्तर पर व्यापक विरोध हुआ. यह आंदोलन पुरेंद्र नारायण सिंह के नेतृत्व में चला, जिसके बाद उस प्रस्ताव को स्थगित कर दिया गया था.
नगर निगम प्रशासन का पक्ष है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन और तत्कालीन मंत्री बन्ना गुप्ता के हस्तक्षेप के बाद पुराने प्रस्ताव को निरस्त करते हुए नई जमीन का प्रस्ताव भेजा गया, जिसे अब विभागीय स्वीकृति मिल चुकी है.
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं होता. हाल ही में नगर निगम बोर्ड की बैठक में फिर से जागृति मैदान में भवन निर्माण का प्रस्ताव सामने आया है. इसके लिए वार्ड सभा बुलाने का निर्देश दिया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक स्तर पर अब भी यह मुद्दा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है.
इस पूरे घटनाक्रम में ‘अदृश्य शक्ति’ की चर्चा भी जोर पकड़ रही है. स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कुछ जनप्रतिनिधि और पार्षद जागृति मैदान के पक्ष या विपक्ष में अचानक क्यों खड़े हो जा रहे हैं. पड़ताल में यह बात सामने आ रही है कि कई नए चुने गए पार्षद या तो पूर्व की प्रक्रियाओं और दस्तावेजों से अनभिज्ञ हैं, या फिर किसी दबाव या प्रभाव में अपनी राय बदल रहे हैं.
वहीं दूसरी ओर एक खेमे पर यह आरोप भी लग रहा है कि वे किसी भी तरह से योजना को वापस जागृति मैदान लाना चाहते हैं, ताकि निर्माण कार्य में संभावित कमीशन का लाभ मिल सके. हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि दोनों पक्षों के पीछे किसी न किसी रूप में ‘अदृश्य शक्ति’ काम कर रही है.
इस पूरे विवाद के बीच नगर निगम की वित्तीय स्थिति भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आई है. सूत्रों के अनुसार नगर निगम के पास बड़े स्तर के निर्माण कार्य के लिए पर्याप्त फंड और संसाधनों की कमी है. ऐसे में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब संसाधन सीमित हैं, तो बार- बार स्थान बदलने और प्रस्तावों में फेरबदल की राजनीति आखिर किस उद्देश्य से की जा रही है.
स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के विवादों के कारण मूलभूत समस्याएं- जैसे जल निकासी, पेयजल आपूर्ति, सड़क, सफाई और बुनियादी सुविधाएं- पिछड़ती जा रही हैं. आरोप यह भी है कि वार्ड सभा के नाम पर पार्षदों के बीच मतभेद पैदा कर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है, ताकि जनप्रतिनिधि असली मुद्दों से भटक जाएं.
फिलहाल सरकारी दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट है कि हथियाडीह में नगर निगम कार्यालय निर्माण को प्रशासनिक मंजूरी मिल चुकी है. लेकिन अब सबकी नजर प्रस्तावित वार्ड सभा और आने वाले फैसलों पर टिकी है, जो तय करेंगे कि विकास की दिशा क्या होगी और राजनीति किस ओर जाएगी.
Santosh Kumar (Chief Editor)

