आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां के उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की कड़ी फटकार और 31 जुलाई की अंतिम समयसीमा तय किए जाने के बाद आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति परियोजना पर काम कर रही एजेंसियां जुडको और जिंदल पूरी रफ्तार से जुट गई हैं. मंगलवार को आदित्यपुर नगर निगम के वार्ड-28 में घर-घर पेयजल आपूर्ति के लिए टेस्टिंग शुरू की गई. शाम करीब 4 बजे रोड नंबर-31 और 32 समेत आसपास के क्षेत्रों के अधिकांश घरों में नलों से पानी छोड़ा गया. शुरुआती परीक्षण के दौरान पाइपलाइन में जमा मिट्टी निकलने के कारण मटमैला पानी आया. लेकिन वर्षों बाद नल से पानी बहता देख स्थानीय लोगों की खुशी देखते ही बन रही थी.



जलापूर्ति को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे जनकल्याण मोर्चा के अध्यक्ष ओमप्रकाश ने कहा कि आदित्यपुर में रहते हुए उन्हें करीब 57 वर्ष हो गए. उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में पीएचईडी द्वारा दिन में तीन बार आधे- आधे घंटे पानी की आपूर्ति होती थी. उस समय लोग नल के नीचे गड्ढा खोदकर बाल्टी से पानी भरते थे और फिर उसे बर्तनों में जमा करते थे. धीरे-धीरे तीन समय की आपूर्ति दो बार और फिर एक बार तक सीमित हो गई. पानी नहीं मिलने पर लोग कुएं और नदी पर निर्भर हो गए.
उन्होंने बताया कि एक दिन भी पानी नहीं आने पर हजारों लोग पीएचईडी कार्यालय से लेकर सीतारामपुर फिल्टर प्लांट तक प्रदर्शन करने पहुंच जाते थे. कई बार अभियंताओं को जनता के भारी आक्रोश और मुकदमों का भी सामना करना पड़ा. वर्ष 1983-84 में भीषण जल संकट के दौरान यूनिसेफ के सहयोग से पीएचईडी मैकेनिकल विभाग ने सार्वजनिक बोरिंग और चापाकल लगाए थे. उसी से लोगों की प्यास बुझती थी. उन्होंने कहा कि पिछले चार दशकों में भूजल स्तर लगातार गिरा है. पहले जहां 70-80 फीट पर पानी मिल जाता था, वहीं अब 600-700 फीट तक बोरिंग करने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है. ऐसे में अब स्थायी समाधान केवल नदी आधारित जलापूर्ति योजना ही है.
ओमप्रकाश ने लोगों से अपील की कि नल से मिलने वाले पेयजल का दुरुपयोग न करें और पानी को सड़क पर बहने से बचाएं. उन्होंने कहा कि यह सुविधा लंबे संघर्ष के बाद मिल रही है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी भी सभी नागरिकों की है.
जिंदल के प्रतिनिधियों ने बताया कि आदित्यपुर-2 के लगभग सभी वार्डों में पाइपलाइन की टेस्टिंग चल रही है. गेल की गैस पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई स्थानों पर जलापूर्ति पाइप क्षतिग्रस्त हो गए थे, जिन्हें युद्धस्तर पर दुरुस्त किया जा रहा है. एजेंसी का दावा है कि पूरी टीम दिन-रात काम कर रही है और 31 जुलाई तक नियमित जलापूर्ति शुरू करने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है.
गौरतलब है कि 15 जुलाई तक जलापूर्ति शुरू करने का वादा पूरा नहीं होने पर उपायुक्त ने सोमवार को सभी संबंधित एजेंसियों और अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी और 31 जुलाई को अंतिम समयसीमा घोषित करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि इसके बाद किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी.
इधर, आदित्यपुर नगर परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष एवं आदित्यपुर-गम्हरिया विकास समिति के अध्यक्ष पुरेंद्र नारायण सिंह ने कहा है कि यदि 31 जुलाई तक आदित्यपुर-2 में नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हुई तो समिति आम जनता के सहयोग से चरणबद्ध और फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू करेगी. उन्होंने परियोजना की यांत्रिक गुणवत्ता पर भी सवाल उठाते हुए तकनीकी जांच की मांग की है.
दूसरी ओर आदित्यपुर-1 के लोगों की चिंता अभी भी बरकरार है. यहां सापड़ा स्थित 60 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जलापूर्ति प्रस्तावित है, लेकिन परियोजना अब भी अधूरी है. वार्ड-17 की पार्षद ने कहा कि वन विभाग की एनओसी समेत अन्य कारणों से काम लंबे समय से अटका हुआ है. उन्होंने निगम प्रशासन से परियोजना की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक करने और उपायुक्त से आदित्यपुर-2 की तरह आदित्यपुर-1 के लिए भी स्पष्ट समयसीमा तय करने की मांग की है. उनका कहना है कि वार्ड-17 ड्राई जोन में शामिल है और यहां के लोग वर्षों से पानी के गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि करीब 392 करोड़ रुपये की लागत वाली आदित्यपुर शहरी जलापूर्ति परियोजना की आधारशिला तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रखी थी. इस महत्वाकांक्षी योजना को तीन वर्षों में पूरा किया जाना था, लेकिन करीब आठ वर्षों बाद भी यह परियोजना अधूरी है. इसे अब तक तीन बार समय विस्तार दिया जा चुका है. परियोजना में लगातार हो रही देरी को लेकर झारखंड हाईकोर्ट भी कड़ा रुख अपना चुका है. अब लोगों की निगाहें 31 जुलाई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि वर्षों से पेयजल संकट झेल रहे आदित्यपुर के नागरिकों को आखिरकार स्थायी राहत मिलती है या इंतजार का सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.





