
जमशेदपुर: चर्चित डीडी बार हत्याकांड ने केवल अपराधियों की भूमिका पर ही नहीं, बल्कि पुलिस व्यवस्था के भीतर जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक चर्चा बिष्टुपुर थाना के तत्कालीन प्रभारी आलोक दुबे की भूमिका को लेकर हो रही है. जिन पर लापरवाही के आरोपों के बाद निलंबन की कार्रवाई हुई, लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह मामला केवल लापरवाही तक सीमित है या इसके पीछे कुछ और भी छिपा है.


आलोक दुबे का विवादों से पुराना नाता रहा है
सरायकेला- खरसावां में आदित्यपुर थाना प्रभारी रहते उन्हें तत्कालीन एसपी आनंद प्रकाश ने निलंबित किया था. इसके बाद उनका तबादला जमशेदपुर हुआ. जहां वह कदमा, बर्मामाइंस और फिर बिष्टुपुर जैसे महत्वपूर्ण थानों की जिम्मेदारी संभालते रहे. पुलिस महकमे में यह चर्चा भी रही कि तत्कालीन एसएसपी पियूष पांडे का उन्हें विशेष संरक्षण प्राप्त था. बाद में सरायकेला- खरसावां की तत्कालीन एसपी निधि द्विवेदी, जो पियूष पांडे की पत्नी भी थीं, उनके भी वह चहेते अधिकारियों में शामिल हो गए. कहा जाता है कि एक चर्चित आदिवासी नेता की गोपनीय गिरफ्तारी कर उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों का विश्वास हासिल किया था.
लेकिन एक पुरानी कहावत है “खैर, खून, खांसी, खुशी, बैर, प्रीत और मद्यपान छिपाए नहीं छिपते.” यही कहावत आज इस पूरे प्रकरण पर भी सटीक बैठती दिखाई दे रही है. यदि डीडी बार हत्याकांड की निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच होती है तथा घटना वाले दिन तत्कालीन एसएसपी पियूष पांडे, तत्कालीन एसपी निधि द्विवेदी और निलंबित थाना प्रभारी आलोक दुबे की मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और आपसी संपर्क की तकनीकी जांच कराई जाती है, तो कई ऐसे तथ्य सामने आ सकते हैं, जो अब तक पर्दे के पीछे हैं.
आलोक दुबे इससे पहले जमशेदपुर के कैरव गांधी अपहरण प्रकरण में कथित संदिग्ध एनकाउंटर को लेकर भी चर्चा में रहे थे. उस मामले में भी पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी को लेकर कई सवाल उठे थे, जिनका स्पष्ट उत्तर आज तक सामने नहीं आ सका. विभाग के भीतर भी उन पर सरायकेला में रहते एक पुलिस अधिकारी को कथित रूप से धोखे से गिरफ्तार करवाने का आरोप लग चुका है. हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है.
पुलिस महकमे में एक और कहावत अक्सर सुनने को मिलती है कि “राजा को अपना राजदार उसी को बनाना चाहिए, जिसमें राजा की हिफाजत करने का माद्दा हो.” लेकिन यदि वही राजदार किसी बड़े विवाद का कारण बन जाए, तो सबसे अधिक नुकसान व्यवस्था और जनता के विश्वास को होता है. जमशेदपुर पुलिस विभाग में आलोक दुबे को एसएसपी का विशेष सिपाहसालार माना जाता था. खबर यह भी है कि कई ट्रांसफर पोस्टिंग में आलोक दुबे का सीधा नियंत्रण था. सरायकेला एसपी निधि द्विवेदी ने दो महीने के छोटे कार्यकाल में जितनी जल्दबाजी ट्रांसफर- पोस्टिंग को लेकर दिखाई उसको लेकर भी कई तरह की चर्चाएं अब जोर पकड़ने लगी है. कुछ तो दबी जुबान से यह भी कह रहे हैं कि रिमोट कंट्रोल जमशेदपुर में ही था. वैसे मैडम की याददास्त बेहद मजबूत है. उन्हें अब अपनी याददास्त पर गुरुर करना चाहिए कि दो महीने के भीतर उन्होंने सरायकेला की जनता को क्या दिया. हां थोक के भाव में ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए उनका कार्यकाल जरूर याद किया जा सकता है.
डीडी बार हत्याकांड में हिमांशु सिंह की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया. इसके बाद दो जिलों के पुलिस कप्तानों का एक साथ हटाया जाना, कई पुलिस अधिकारियों का निलंबन और लगातार हो रही कार्रवाई यह संकेत देती है कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच केवल निचले स्तर तक सीमित रहेगी, या फिर तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उन सभी पहलुओं की भी पड़ताल होगी, जिनकी चर्चा पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में लगातार हो रही है. चर्चा यह भी है कि मुख्यमंत्री ने इतना बड़ा एक्शन इसलिए लिया कि इस जघन्य हत्याकांड में शामिल आरोपी गम्हरिया निवासी विश्वनाथ मंडल उर्फ़ बोदरा एक बड़े भाजपा नेता के करीबी थे. खबर यह भी है कि उन्हीं के इशारे पर पुलिस कर्मियों ने हिमांशु और प्रत्युष को बचाया नहीं. इसमें बार मालिक और भाजपा नेता नीरज सिंह की भूमिका की जांच तो शुरू हो चुकी है मगर उस गुमनाम भाजपा नेता का नाम सार्वजनिक होगा या नहीं इसपर शंशय है. मुख्य आरोपी मूल रूप से अवैध शराब कारोबारी है. अब सबकी निगाहें हिमांशु हत्याकांड के पहले खुलासे पर टिकी है.
क्योंकि जबतक सच सामने नहीं आ जाता तबतक सूत्रों की चांदी रहेगी. सूत्र कई तरह की जानकारियां देंगे मगर असल मुहर तो पुलिस का ही लगेगा. वैसे इस चर्चित हत्याकांड में अबतक भाजपा नेता नीरज सिंह का नाम ही चर्चा में है और बीजेपी ने शुक्रवार को जमशेदपुर बंद बुलाया है. इस मामले में भी अब सबकी निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि वे इस हत्याकांड के हर पहलू से पर्दा उठाती हैं या नहीं. वैसे यह घटनाक्रम सरकार के लिए भी प्रतिष्ठा का विषय बन गया है.
Edited By Sarita





