
सरायकेला: जिले में सड़क दुर्घटनाएं अब सामान्य हादसे नहीं, बल्कि एक भयावह त्रासदी का रूप ले चुकी हैं. बीते एक सप्ताह के भीतर सड़क दुर्घटनाओं में 14 लोगों की मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है. लगातार हो रही मौतों के बावजूद प्रशासनिक तंत्र की निष्क्रियता और संबंधित विभागों की उदासीनता लोगों के आक्रोश को और बढ़ा रही है.


जिले के विभिन्न सड़क मार्गों पर आए दिन हो रही दुर्घटनाओं ने आम लोगों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर सरायकेला-खरसावां में मौत का यह सिलसिला कब रुकेगा. लोग पूछ रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी बड़े जनआंदोलन या और अधिक मौतों का इंतजार कर रहा है.
ट्रैफिक पुलिस चालान में व्यस्त सड़क सुरक्षा भगवान भरोसे
लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक पुलिस का पूरा ध्यान केवल बाइक चालकों का चालान काटने पर केंद्रित है. हेलमेट और कागजात जांच के नाम पर अभियान तो चलाए जा रहे हैं, लेकिन सड़क दुर्घटनाओं के वास्तविक कारणों पर कोई गंभीर कार्रवाई नहीं दिख रही है.
जिले की सड़कों पर दिन-रात दौड़ रहे ओवरलोड ट्रक, बालू और गिट्टी लदे भारी वाहन, तेज रफ्तार हाइवा तथा नियमों की धज्जियां उड़ाते कमर्शियल वाहन खुलेआम चलते दिखाई देते हैं. इन्हें रोकने और जांचने की जिम्मेदारी निभाने वाला तंत्र कहीं नजर नहीं आता.
परिवहन विभाग बिना कप्तान के, कार्रवाई ठप
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले का परिवहन विभाग पिछले लगभग एक महीने से नियमित पदाधिकारी के बिना संचालित हो रहा है. ऐसे में ओवरलोडिंग, फिटनेस जांच, परमिट सत्यापन और सड़क सुरक्षा नियमों के पालन की निगरानी लगभग ठप पड़ गई है.
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब विभाग का संचालन ही प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा है तो सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा.
खस्ताहाल सड़कें बन रहीं मौत का कारण
जिले की कई प्रमुख सड़कें लंबे समय से जर्जर स्थिति में हैं. जगह- जगह गड्ढे, टूटी सड़कें, खराब ड्रेनेज व्यवस्था और अपर्याप्त संकेतक दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे हैं. कई स्थानों पर सड़क निर्माण और मरम्मत कार्य वर्षों से अधूरे पड़े हैं. बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. सड़क और गड्ढे में अंतर करना मुश्किल हो जाता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाती है.
ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई क्यों नहीं ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले की सड़कों पर क्षमता से अधिक भार लेकर चल रहे वाहन न केवल सड़कें तोड़ रहे हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का बड़ा कारण भी बन रहे हैं. कई बार ओवरलोड वाहनों के कारण ब्रेक फेल, संतुलन बिगड़ने और पलटने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इसके बावजूद संबंधित विभागों की ओर से कोई व्यापक अभियान नहीं चलाया जा रहा है. लोगों का आरोप है कि छोटे वाहन चालकों पर कार्रवाई आसान है, जबकि बड़े और प्रभावशाली वाहन मालिकों पर हाथ डालने से विभाग बचता नजर आता है.
जनता में भारी आक्रोश, उठ रही जवाबदेही तय करने की मांग
लगातार हो रही मौतों से जिले में गहरा आक्रोश है. सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों ने प्रशासन से सड़क सुरक्षा को लेकर ठोस और तत्काल कदम उठाने की मांग की है. लोगों का कहना है कि केवल संवेदना व्यक्त करने और जांच के आदेश देने से समस्या का समाधान नहीं होगा.
जिले में सड़क सुरक्षा के लिए विशेष अभियान, ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई, खराब सड़कों की तत्काल मरम्मत, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान तथा परिवहन विभाग में पदाधिकारियों की त्वरित नियुक्ति की मांग जोर पकड़ रही है. एक सप्ताह में 14 लोगों की मौत के बाद भी यदि व्यवस्था नहीं जागती, ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई नहीं होती, जर्जर सड़कों की मरम्मत नहीं होती और जिम्मेदार विभाग निष्क्रिय बने रहते हैं, तो यह सवाल और भी बड़ा हो जाता है. आखिर सरायकेला- खरसावां में मौत का यह सिलसिला कब रुकेगा ? और इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा.
प्रमोद सिंह
संपादक






