
सरायकेला: जिले के उत्कृष्ट विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता और परीक्षा परिणाम सुधारने के नाम पर जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा जारी 11 शिक्षकों के प्रतिनियोजन आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है. जहां विभाग इस निर्णय को शैक्षणिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम बता रहा है, वहीं शिक्षा जगत, अभिभावकों और स्थानीय लोगों के बीच सबसे अधिक चर्चा एनआर प्लस टू मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला की प्रधानाध्यापिका अम्बिका प्रधान को हटाकर वरीय शिक्षक वासुदेव राम को विद्यालय का प्रभार सौंपने को लेकर हो रही है.


सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिस विद्यालय का परीक्षा परिणाम हाल के वर्षों में संतोषजनक रहा और जहां की प्रधानाध्यापिका के कार्यकाल में शैक्षणिक गतिविधियों में सुधार देखने को मिला, वहां अचानक नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता क्यों महसूस हुई. यदि विद्यालय का प्रदर्शन बेहतर था तो फिर आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि प्रधानाध्यापिका को हटाकर किसी अन्य शिक्षक को प्रभार सौंप दिया गया.
*क्या पूरे जिले में योग्य शिक्षकों की कमी है ?*
शिक्षा विभाग के आदेश के बाद जिले में एक और सवाल जोर पकड़ रहा है. लोगों का कहना है कि जिन वासुदेव राम को विद्यालय का प्रभारी बनाया गया है, उनके नाम को लेकर पूर्व में विभिन्न स्तरों पर विवाद और शिकायतों की चर्चा होती रही है. ऐसे में विभाग ने आखिर किन मानकों के आधार पर उन्हें विद्यालय की कमान सौंपने का निर्णय लिया. लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या पूरे जिले में उनसे अधिक योग्य, अनुभवी और निष्पक्ष छवि वाले शिक्षक उपलब्ध नहीं थे. यदि थे, तो फिर चयन की प्रक्रिया क्या रही और उसका आधार क्या था.
*पुराने विवाद फिर चर्चा में*
शिक्षा विभाग के इस निर्णय के बाद सोशल मीडिया और शिक्षा जगत में पुराने विवादों की चर्चा भी फिर से शुरू हो गई है. कुछ लोगों का दावा है कि पूर्व में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी के पक्ष में वासुदेव राम का कथित बातचीत का एक ऑडियो भी चर्चा में रहा था. हालांकि उस मामले में विभाग की ओर से कोई सार्वजनिक कार्रवाई या आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया था. ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि यदि आरोप निराधार थे तो विभाग ने स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की, और यदि गंभीर थे तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई.
*वर्षों से एक ही विद्यालय में जमे रहने पर भी सवाल*
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिक्षक वासुदेव राम लंबे समय से एक ही विद्यालय में कार्यरत हैं. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि जब विभाग समय-समय पर स्थानांतरण और प्रतिनियोजन की नीति लागू करता है, तब कुछ शिक्षकों पर यह नियम प्रभावी क्यों नहीं दिखता. क्या उन्हें किसी विशेष संरक्षण का लाभ मिल रहा है या फिर विभाग इस मामले में अलग मानक अपनाता है.
*इन शिक्षकों का किया गया प्रतिनियोजन*
अम्बिका प्रधान (संस्कृत)- एनआर मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला से वर्शेनी प्लस टू उच्च विद्यालय, सीनी.
नारायण कुमार (हिंदी)- केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला से मॉडल स्कूल, कुचाई.
विजय कुमार महतो (गणित एवं भौतिकी)- केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला से उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बरेदा (नीमडीह).
कविता कुमारी (जीवविज्ञान एवं रसायन विज्ञान)- एनआर मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला से उत्क्रमित उच्च विद्यालय, नित्यानंद सिंदरी.
मुक्ता हासा (हिंदी)- एनआर मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला से केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला.
मालती हांसदा (गणित एवं भौतिकी)- एनआर मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला से परियोजना उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय, सोसोमाली.
प्रीतम कुमार दास (गणित एवं भौतिकी)- उत्क्रमित उच्च विद्यालय, बरेदा (नीमडीह) से केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला.
आशा गुप्ता (रसायन विज्ञान)- एसएस प्लस टू उच्च विद्यालय, राजनगर से केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला.
पंकज कुमार साह (इतिहास)- उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय, कपाली (चांडिल) से केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला.
सोनी रोज गुड़िया (भूगोल)- एएन प्लस टू उच्च विद्यालय, पिलीद (ईचागढ़) से केवीपीएसडी मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला.
सुब्रत अधिकारी (गणित एवं भौतिकी)- प्लस टू उच्च विद्यालय, रघुनाथपुर से एनआर मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय, सरायकेला.
आदेश की सबसे विवादित शर्त
आदेश में अम्बिका प्रधान को तीन दिनों के भीतर विद्यालय का संपूर्ण प्रभार, जिसमें वित्तीय प्रभार भी शामिल है, वासुदेव राम को सौंपने का निर्देश दिया गया है. यही बिंदु अब पूरे मामले का केंद्र बन गया है. शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि विभाग को इस निर्णय के पीछे का कारण सार्वजनिक करना चाहिए ताकि अनावश्यक विवाद और आशंकाएं समाप्त हो सकें.
*जवाब का इंतजार*
फिलहाल जिला शिक्षा पदाधिकारी की ओर से इस निर्णय को लेकर कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. लेकिन जिस तरह से यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है, उससे स्पष्ट है कि लोगों के मन में कई सवाल हैं. जब तक विभाग इन सवालों का जवाब नहीं देता, तब तक यह बहस जारी रहेगी कि यह फैसला वास्तव में शैक्षणिक सुधार के लिए लिया गया है या इसके पीछे कोई और कारण है. सबसे बड़ा सवाल यही है. बेहतर परिणाम देने वाली प्रधानाध्यापिका को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी और आखिर किन कारणों से वासुदेव राम को विद्यालय का प्रभारी बनाया गया.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह
(संपादक)






