सरायकेला: नगर पंचायत क्षेत्र में घर-घर से कचरा उठाने की जिम्मेदारी निभा रही एमएसडब्ल्यू एजेंसी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. नगर पंचायत के 11 वार्डों के लोगों का आरोप है कि एजेंसी नियमित रूप से कचरा संग्रहण नहीं कर रही है, जबकि हर महीने लाखों रुपये का भुगतान किया जा रहा है.


स्थानीय लोगों का कहना है कि कई वार्डों में सप्ताहों तक कचरा नहीं उठाया जाता. इससे गंदगी बढ़ रही है और लोगों को दुर्गंध तथा संक्रामक बीमारियों का खतरा झेलना पड़ रहा है. लोगों का आरोप है कि एजेंसी के वाहन घरों का कचरा उठाने के बजाय कई बार कोयले का डस्ट और अन्य भारी सामग्री ढोते नजर आते हैं, जिससे कागजों में अधिक कचरा उठाने का दावा किया जा सके.
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जानकारों के अनुसार पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में प्रभावी कचरा प्रबंधन के लिए कम से कम पांच वाहनों की जरूरत है, लेकिन अधिकांश दिनों में केवल एक या दो वाहन ही संचालित होते दिखाई देते हैं. ऐसे में 11 वार्डों की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
सूत्रों के अनुसार एजेंसी का मासिक बिल लगभग 3 से 3.5 लाख रुपये तक पहुंचता है. नागरिकों ने मांग की है कि एजेंसी के वाहनों की जीपीएस रिपोर्ट, दैनिक कचरा संग्रहण रजिस्टर, वजन पर्ची और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच कराई जाए.
इस मामले पर नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी ने कहा कि एजेंसी को घरों से कचरा संग्रह करना है, न कि ईंट, कंकड़, बालू या अन्य सामग्री उठाकर वजन बढ़ाना. उन्होंने कहा कि शिकायतें लगातार मिल रही हैं और मामले की जांच कर दोषी पाए जाने पर एजेंसी के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी. आवश्यकता पड़ने पर एजेंसी को ब्लैकलिस्ट भी किया जाएगा.
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मनोज चौधरी (नगर अध्यक्ष)
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह

