चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिले के मंझारी प्रखंड अंतर्गत भागाबिला पंचायत के बरकीमारा गांव में सरकारी आवास योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत एक बार फिर सामने आई है. यहां दो गरीब परिवार आज भी अत्यंत जर्जर मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं.


गांव की सुनीता पूर्ति के घर की स्थिति बेहद दयनीय है. उनके आवास के नाम पर केवल मिट्टी की जर्जर दीवारें बची हैं जो किसी भी समय गिर सकती हैं. वहीं योगेंद्र बिरूवा का परिवार आज भी मिट्टी और पुआल से बने कच्चे मकान में जीवन यापन कर रहा है. बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब छत से लगातार पानी टपकता है और पूरा परिवार कठिन परिस्थितियों में रहने को मजबूर होता है.
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना और अबुआ आवास योजना जैसी कई महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन इन योजनाओं का लाभ कई वास्तविक पात्र परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है.

इस मामले को लेकर जिला परिषद सदस्य माधव चंद्र कुंकल ने कहा कि यदि सरकारी योजनाओं का सही ढंग से क्रियान्वयन किया जाए तो कोई भी गरीब परिवार पक्का मकान से वंचित नहीं रहेगा. उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर आयोजित शिविरों में लोग उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, लेकिन कई बार ये केवल औपचारिकता बनकर रह जाते हैं.
उन्होंने आगे बताया कि सुनीता पूर्ति और योगेंद्र बिरूवा दोनों ही अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना और राज्य सरकार की अबुआ आवास योजना से वंचित हैं, जबकि वे पूरी तरह पात्र हैं. उन्होंने इस मामले को उपायुक्त के समक्ष उठाकर दोनों परिवारों को शीघ्र आवास योजना से जोड़ने की मांग करने की बात कही है.
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर सरकारी आवास योजनाओं का लाभ दिया जाए, ताकि कोई भी परिवार असुरक्षित और जर्जर घरों में जीवन यापन करने को मजबूर न रहे.
रिपोर्ट: ज्योतिष महाली



